Success story: खेती में नया प्रयोग, पुराने टायर और कम खर्चे में ड्रैगन फ्रूट उगाकर लाखों कमा रहा किसान

Success story: खेती में नया प्रयोग, पुराने टायर और कम खर्चे में ड्रैगन फ्रूट उगाकर लाखों कमा रहा किसान

बिहार के किशनगंज के एक किसान ने ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए एक शानदार और सस्ता 'देसी जुगाड़' खोज निकाला है, जिसे 'टायर मॉडल' कहा जा रहा है. आमतौर पर ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सहारा देने के लिए महंगे सीमेंट के पोल और ढांचे की जरूरत होती है, जिसमें काफी पैसा खर्च होता है.

ड्रैगन फ्रूट की खेतीड्रैगन फ्रूट की खेती
जेपी स‍िंह
  • नई दिल्ली,
  • Jan 03, 2026,
  • Updated Jan 03, 2026, 1:12 PM IST

बिहार के अधिकांश हिस्सों में आज भी किसान धान, गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों पर ही निर्भर हैं. इन फसलों में लागत अधिक और मुनाफा सीमित होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार नहीं हो पा रहा था. ऐसे में किशनगंज जिले के ठाकुरगंज के रहने वाले ग्रेजुएट किसान नागराज नखत ने अपनी 12 वर्षों की विशेषज्ञता और नई सोच से एक अलग राह चुनी. उन्होंने पारंपरिक फसलों के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती को अपनाया और यह साबित कर दिया कि अगर तकनीक और समझ का सही मेल हो, तो बिहार की मिट्टी सोना उगल सकती है. उन्होंने महसूस किया कि अगर किसान को अपनी आमदनी बढ़ानी है, तो उसे लीक से हटकर सोचना होगा. उन्होंने अपनी बंजर और खाली पड़ी जमीन पर 'ड्रैगन फ्रूट' जैसे विदेशी फल की खेती शुरू करने का साहस दिखाया, जो न केवल सेहत के लिए अच्छा है बल्कि बाजार में इसकी कीमत भी बहुत अधिक है.

ड्रैगन फ्रूट में टायर मॉडल का जादू

ड्रैगन फ्रूट की खेती में सबसे बड़ी चुनौती इसके भारी पौधों को सहारा देने की होती है. आमतौर पर इसके लिए महंगे कंक्रीट के खंभे लगाए जाते हैं, जो हर किसान के बजट में नहीं होते. ड्रैगन फ्रूट की खेती में सबसे बड़ी चुनौती पौधों को सहारा देने वाले स्ट्रक्चर की होती है, जो आमतौर पर बहुत महंगे होते हैं. नागराज ने इस समस्या का एक देसी और किफायती समाधान निकाला. उन्होंने अपने 12 साल के अनुभव का इस्तेमाल करते हुए एक शानदार 'लो-कॉस्ट मॉडल' तैयार किया. उन्होंने ईंट, सीमेंट, रेत और लोहे की छड़ों का उपयोग करके एक ढांचा बनाया और उसके ऊपर पुराने मोटरसाइकिल के टायरों को फिट कर दिया. यह करीब 6 फीट ऊंचा ढांचा पौधों को गिरने से बचाता है और उन्हें ऊपर फैलने के लिए एक मजबूत आधार देता है.

किशनगंज के किसान का कमाल

नागराज ने वैज्ञानिक तरीके को अपनाते हुए पौधों के बीच की दूरी 3 फीट × 3 फीट रखी है, जिससे एक एकड़ में लगभग 600 खम्बे पर 2400 पौधे लगाए जा सकते हैं. ऊपर लगा हुआ गोल टायर पौधे की टहनियों को चारों तरफ फैलने में मदद करता है. इससे पौधों को भरपूर धूप और हवा मिलती है, जिससे बीमारियां कम लगती हैं और फल की गुणवत्ता बेहतरीन होती है. एक ढांचे को बनाने में मात्र 250 से 300 रुपये का खर्च आता है, लेकिन इसकी उम्र 15 साल से भी ज्यादा है. यह तकनीक 'कबाड़ से कंचन' बनाने का एक सटीक उदाहरण है.

टायर मॉडल से बंपर कमाई

इस खेती का सबसे बड़ा फायदा इससे होने वाली शानदार कमाई है. ड्रैगन फ्रूट के एक पौधे से औसतन 5 से 6 किलो फल मिलते हैं. अगर एक एकड़ में 2400 पौधे लगाए जाएं और बाजार में भाव 80 से 100 रुपये प्रति किलो भी मिले, तो साल भर में 12 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हो सकती है. अगर इसमें से लागत निकाल दें, तो भी किसान को शुद्ध 6 लाख की बचत होती है. मुनाफे की बात यहीं खत्म नहीं होती. नागराज फलों के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट की कलमें भी बेचते हैं. एक कलम 30 से 40 रुपये में बिकती है, जिससे साल भर में 1 से 2 लाख रुपये की अलग से आमदनी हो जाती है. जहां पारंपरिक फसलों में जोखिम ज्यादा और मुनाफा कम है, वहीं यह मॉडल किसानों की किस्मत बदलने वाला साबित हो रहा है. 

'टायर मॉडल' हो रहा सुपरहिट

किसान नागराज की यह तकनीक आज के दौर में 'जलवायु अनुकूल कृषि' का बेहतरीन उदाहरण है. इसे उन इलाकों में आसानी से अपनाया जा सकता है जहां जमीन कम उपजाऊ है.  अगर इस मॉडल को बढ़ावा दिया जाए, तो बिहार का हर छोटा किसान आर्थिक रूप से मजबूत बन सकता है. किसान नागराज की कहानी हमें सिखाती है कि खेती में अगर विज्ञान के साथ थोड़ा सा 'देसी जुगाड़' मिला दिया जाए, तो मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है.

MORE NEWS

Read more!