
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती को लेकर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में सोयाबीन की कीमतों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊपर बने रहना है. यही कारण है कि मध्य भारत के प्रमुख उत्पादक राज्यों में जो किसान मक्का की खेती किए थे वो इस साल फिर से इस तिलहन फसल की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं. सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) का अनुमान है कि इस साल सोयाबीन का रकबा पिछले साल की तुलना में 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है.
SOPA के कार्यकारी निदेशक डी.एन. पाठक ने बताया कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों में खरीफ 2026 के लिए सोयाबीन की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है. उनके अनुसार, किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिलने की वजह से इस बार सोयाबीन की खेती का रकबा बढ़ने की पूरी संभावना है. पिछले साल देश में लगभग 114 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की खेती हुई थी, जबकि इस बार इसमें 5 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है. उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में फिलहाल सोयाबीन 6,700 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है. वहीं, केंद्र सरकार ने खरीद वर्ष 2026-27 के लिए सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5,708 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. MSP से अधिक कीमत मिलने के कारण किसान इस फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
'बिजनेस लाइन' के अनुसार, 8 जुलाई तक SOPA का अनुमान है कि देश में 100.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है, जबकि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार यह रकबा 57.92 लाख हेक्टेयर है. डी.एन. पाठक का कहना है कि सरकारी आंकड़ों में सामान्य तौर पर 7 से 10 दिन की देरी होती है, इसलिए दोनों आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है. SOPA के मुताबिक मध्य प्रदेश में 44.25 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 40.25 लाख हेक्टेयर और राजस्थान में 7.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है. वहीं, सरकारी आंकड़े इन राज्यों में इससे काफी कम क्षेत्र दिखा रहे हैं.
इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून थोड़ी देरी से पहुंचा था, जिससे शुरुआती दिनों में बुवाई प्रभावित हुई. हालांकि, बाद में अच्छी बारिश होने के कारण किसानों ने तेजी से बुवाई पूरी की है. SOPA के अनुसार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में लगभग 90 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि महाराष्ट्र में भी 80 से 90 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई पूरी हो गई है. हालांकि, कुछ इलाकों में कम बारिश के कारण बीजों का अंकुरण प्रभावित हुआ है. इसकी वजह से लगभग 1 से 2 प्रतिशत क्षेत्र में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है. इसके बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में फसल की स्थिति फिलहाल अच्छी बताई जा रही है.
इस समय सोयाबीन की फसल शुरुआती बढ़वार में है. किसान खरपतवार नियंत्रण के लिए हर्बिसाइड्स के साथ-साथ पारंपरिक तरीके जैसे कोल्पा और डोरा का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि फसल की बढ़वार बेहतर हो सके. वहीं, SOPA का कहना है कि अभी फसल की स्थिति सामान्य से अच्छी है, लेकिन अंतिम उत्पादन आने वाले तीन महीनों के मौसम पर निर्भर करेगा. यदि समय पर पर्याप्त बारिश होती रही और मौसम अनुकूल रहा, तो इस साल सोयाबीन की पैदावार पिछले साल की तुलना में अधिक हो सकती है.
बाजार में MSP से अधिक कीमत और अनुकूल मौसम की स्थिति को देखते हुए किसानों को इस बार सोयाबीन से बेहतर उत्पादन और अच्छी आमदनी मिलने की उम्मीद है. यदि मॉनसून पूरे सीजन में साथ देता है, तो देश में सोयाबीन उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी सकारात्मक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.