
एक अक्टूबर से शुरू हुए खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) के पहले पखवाड़े में केंद्र द्वारा चावल की खरीद जोर-शोर से शुरू कर दी गई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 15 अक्टूबर तक देश में 56.04 लाख टन धान की खरीद हुई है. सरकारी खरीद की रफ्तार पिछले साल से अधिक बताई गई है. जो खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार के लिए अच्छा संकेत है. कुल खरीद में सबसे ज्यादा योगदान हरियाणा का है. हरियाणा में इस साल खरीद 25 सितंबर से ही शुरू हो गई है. जबकि तमिलनाडु में 1 सितंबर से शुरू हुई थी. दूसरी ओर पंजाब और पश्चिम यूपी में 1 अक्टूबर से इसकी शुरुआत की गई है. हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश में खरीद 1 नवंबर से शुरू होगी, क्योंकि वहां फसल की कटाई देर से शुरू होती है.
पंजाब, जो सेंट्रल पूल यानी बफर स्टॉक में शीर्ष चावल योगदानकर्ताओं में से एक है, ने 15 अक्टूबर तक 19.70 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है. जबकि हरियाणा ने पंजाब को भी पीछे छोछ़ते हुए 33.14 लाख मीट्रिक टन की खरीद कर ली है. ये दोनों राज्य धान की खरीद में सबसे आगे रहते हैं. पंजाब कई साल से इस मामले में पहले नंबर पर बना हुआ है. धान की खरीद के मामले में तेलंगाना और छत्तीसगढ़ भी आगे रहते हैं लेकिन इस साल अभी वहां पर खरीद शुरू नहीं हुई है. तमिलनाडु में 2.83 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है.
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एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल उत्तर प्रदेश में भी धान की सरकारी खरीद अच्छी है. क्योंकि खरीद एक साल पहले की समान अवधि में 488 टन के मुकाबले 6,844 टन तक पहुंच गई है. उत्तराखंड में भी धान की खरीद शुरू हो गई है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ भी खरीद शुरू करने वाले सूबों में शामिल हैं. हालांकि, बारिश की वजह से हरियाणा और पंजाब में खरीद प्रभावित हुई है.
खरीफ मार्केटिंग सीजन 2022-23 में 847.66 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है, जो 2020-21 के मुकाबले करीब 10 लाख मीट्रिक टन कम है. साल 2021-22 में 857.30 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था. जबकि 2020-21 में रिकॉर्ड 895.65 लाख मीट्रिक टन की खरीद की गई थी. अगर चावल के टर्म में देखा जाए तो 2022-23 में 569.46 लाख टन की खरीद हुई थी. जबकि 2020-21 में रिकॉर्ड 602.45 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदा गया था. खरीफ मार्केटिंग सीजन 2023-24 के लिए सामान्य धान की एमएसपी 2183 ग्रेड ए की 2203 रुपये प्रति क्विंटल है.
सरकार ने पहले ही उबले चावल पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाया हुआ है. यही नहीं उसने इसे फिलहाल 31 मार्च, 2024 तक जारी रखने का फैसला किया है. जबकि गैर बासमती सफेद चावल के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध जारी है. कृषि मंत्रालय ने अभी तक खरीफ सीजन का फसल अनुमान जारी नहीं किया है, जिससे अगस्त में 1901 के बाद से 36 प्रतिशत की सबसे अधिक वर्षा की कमी के बाद उत्पादन में गिरावट की अटकलें लगाई जा रही हैं. हालांकि, इस खरीफ सीजन में धान का रकबा पिछले साल के 404.27 हेक्टेयर के मुकाबले 2 प्रतिशत अधिक यानी 411.96 लाख हेक्टेयर है. यह एक राहत वाली बात है.
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