
कांच नगरी फिरोजाबाद अब सिर्फ अपने कांच उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि तेजी से आगे बढ़ती कृषि गतिविधियों के लिए भी पहचानी जाने लगी है. आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और किसानों की मेहनत से यहां की खेती लगातार बेहतर हो रही है. इसी कड़ी में इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार के कोशिश से “किसान तक का किसान कारवां” का आयोजन फिरोजाबाद जिले के हथवंत ब्लॉक स्थित बाबाईंन गांव में किया गया. यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के उत्तरी जिलों की विशेष कृषि कवरेज का नौवां पड़ाव था.
जैसे ही किसान कारवां बाबाईंन गांव पहुंचा, आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पुरुष और महिला किसान कार्यक्रम में पहुंच गए. किसानों में नई कृषि तकनीकों को जानने और कृषि विशेषज्ञों से सीधे बातचीत करने को लेकर खास उत्साह देखने को मिला. सभी किसान खेती से जुड़ी नई जानकारियों को ध्यान से सुनते नजर आए.
कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने किसानों को उन्नत खेती के तरीकों, फसल विविधीकरण, मिट्टी की जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, कीट और रोग प्रबंधन और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खास जानकारी दी. साथ ही किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया.
विशेषज्ञों ने बताया कि फिरोजाबाद जिले में अब किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन, दलहन-तिलहन और नकदी फसलों की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इससे किसानों की आमदनी में अच्छा इजाफा हो रहा है. किसान कारवां के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि अगर वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए, तो कम लागत में भी अधिक उत्पादन किया जा सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र फिरोजाबाद के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. ओंकार सिंह यादव ने किसानों को बताया कि कई बार किसान मेहनत तो पूरी करते हैं, लेकिन गलत तकनीक अपनाने की वजह से आय नहीं बढ़ पाती. उन्होंने किसानों को प्रमाणित बीजों का उपयोग करने और सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की सलाह दी.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. तेज प्रताप ने सही सिंचाई पद्धतियों पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर जल प्रबंधन से पानी की बचत के साथ-साथ फसल उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने किसानों को “ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना की जानकारी दी और इसके फायदे बताए.
फिरोजाबाद के उप कृषि निदेशक डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही. उन्होंने बताया कि गोबर को सड़क किनारे इकट्ठा करने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. अगर गोबर को सही तरीके से संरक्षित कर खेतों में इस्तेमाल किया जाए, तो मिट्टी में कार्बनिक तत्व बढ़ते हैं, जिससे उत्पादन और किसानों की आय दोनों में बढ़ोतरी होती है.
गौ सेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने कहा कि गाय खेती की सबसे बड़ी सहयोगी है. गाय आधारित खेती से न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है, बल्कि जमीन की उर्वरा शक्ति भी मजबूत होती है. उन्होंने कहा कि गाय केवल खेती से ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति से भी गहराई से जुड़ी हुई है.
इफको के जिला प्रबंधक राजेश कुमार ने किसानों को नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि डीएपी की एक बोतल एक बोरी के बराबर प्रभावी होती है, जिससे बीज शोधन और फसल पर छिड़काव कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने बताया कि फिरोजाबाद जिले की मिट्टी में कार्बनिक तत्व लगातार कम हो रहे हैं. इसे बढ़ाने के लिए गोबर और जैविक खाद का अधिक से अधिक उपयोग जरूरी है.
चंबल फर्टिलाइजर के क्षेत्रीय अधिकारी जाकिर खान ने मिट्टी परीक्षण के लिए सही सैंपल लेने की प्रक्रिया समझाई. उन्होंने बताया कि खेत की पांच अलग-अलग जगहों से मिट्टी लेकर मिश्रित नमूना तैयार करना चाहिए, ताकि उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जा सके.
कार्यक्रम के दौरान किसानों के लिए लकी ड्रा का आयोजन भी किया गया. 3000 रुपये का पुरस्कार चंद्रपाल को मिला, जबकि 2000 रुपये का पुरस्कार हरी बाबू के नाम रहा. इसके अलावा 500 रुपये के 10 अन्य विजेताओं की भी घोषणा की गई.
कुल मिलाकर, बाबाईंन गांव में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद जानकारी से भरा, प्रेरणादायक और उपयोगी साबित हुआ. आने वाले पड़ावों में भी किसान कारवां प्रदेश के किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और लाभकारी खेती की दिशा दिखाता रहेगा.
1. किसान कारवां क्या है?
किसानों से सीधे जुड़ने वाला किसान तक का विशेष कृषि अभियान।
2. किसान कारवां का उद्देश्य क्या है?
किसानों की समस्याएं, समाधान और नई जानकारी सामने लाना।
3. किसान कारवां किन जगहों पर हो रहा है?
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में।
4. किसान कारवां किन किसानों के लिए है?
छोटे, सीमांत, युवा, महिला और प्रगतिशील किसान—सभी के लिए।
5. किसान कारवां में क्या-क्या जानकारी मिलेगी?
खेती, लागत घटाने के तरीके, तकनीक और योजनाओं की जानकारी।
6. क्या किसान अपनी समस्या सीधे बता सकते हैं?
हां, किसान अपनी बात सीधे मंच पर रख सकते हैं।
7. क्या इसमें भाग लेने के लिए शुल्क है?
नहीं, किसानों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है।
8. किसान कारवां की जानकारी कहां मिलेगी?
किसान तक के सोशल मीडिया हैंडल और यूट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@kisantakofficial पर
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