
कर्नाटक में आम खरीदारों और किसानों, दोनों के लिए यह सीजन अच्छा नहीं है. मौसम में बार-बार होने वाले बड़े बदलावों ने कर्नाटक में आम उत्पादन को काफी कम कर दिया है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं. इस साल उत्पादन में लगभग 5 लाख टन की गिरावट की आशंका है, जिसके चलते आम की कीमतें बढ़कर 150-200 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की संभावना है.
एक अच्छे साल में, जब मौसम ठीक रहे तो राज्य भर में 1.4 लाख हेक्टेयर जमीन पर उगाए गए आमों से 16 लाख टन से ज्यादा फल का उत्पादन होता है. कर्नाटक के 'आम बोर्ड' के अनुसार, इस साल कुल उत्पादन घटकर 10-11 लाख टन रहने की उम्मीद है.
बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि चल रही लू और लंबे समय तक पड़े सूखे के कारण मैसूर के बाजारों में अच्छी क्वालिटी वाले आमों के आने में काफी देरी हुई है, जिससे खरीदारों और व्यापारियों, दोनों में ही चिंता बढ़ गई है.
पिछले साल के विपरीत, इस साल अच्छे आमों की आवक कम देखी जा रही है और क्वालिटी भी औसत से कम है. विशेषज्ञ इसका कारण बहुत अधिक तापमान और मिट्टी में नमी की कमी को मानते हैं, जिसने फसल पर बुरा असर डाला है.
मैसूर के बागवानी महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ गिरिगोवड़ा ने 'दि हिंदू' को बताया कि लगातार सूखे मौसम के कारण आम की फसल 'पाउडरी मिल्ड्यू' (फफूंदी) जैसी बीमारियों और रस चूसने वाले कीटों के हमले की चपेट में आ गई है. उन्होंने समझाया, "इन कारणों से काफी मात्रा में फल झड़ गए हैं."
आमों के आने में देरी और उत्पादन में गिरावट के कारण कीमतें बढ़ गई हैं. देवराज बाजार में, केवल कुछ ही दुकानदार आम बेच रहे हैं, जिनमें 'रासपुरी' मुख्य किस्म के तौर पर उपलब्ध है.
हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि ये फल आकार में छोटे हैं और इनकी क्वालिटी भी औसत दर्जे की है. बाजार में एक किलो 'रासपुरी' की कीमत लगभग 100 रुपये है, जबकि सुपरमार्केट में बेहतर दिखने वाले आम 180-200 रुपये प्रति किलो की दर से बेचे जा रहे हैं.
आमों का एक प्रमुख निर्यातक होने के नाते कर्नाटक भी ईरान युद्ध से पैदा हुए हालात से अछूता नहीं है. लेकिन व्यापारियों को उम्मीद है कि एक तरफ का घाटा, दूसरी तरफ किसी देश से पूरा हो जाएगा. इस बार यूरोप को 1,000-1,500 टन और अमेरिका को लगभग 500 टन एक्सपोर्ट होने का अनुमान है. कर्नाटक से मुख्य तौर पर पल्प का एक्सपोर्ट होता है, खासकर तोतापुरी किस्म का, जो कि खाड़ी देशों को भेजा जाता है. यह आमतौर पर जून में होता है, और उम्मीद है कि तब तक स्थिति नॉर्मल हो जाएगी.