वैश्विक कीमतों में उछाल का असर, भारत ने 75000 टन सोयाबीन तेल आयात किया रद्द

वैश्विक कीमतों में उछाल का असर, भारत ने 75000 टन सोयाबीन तेल आयात किया रद्द

भारत जो दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन तेल खरीदार है, उसने हाल ही में कई देशों से आने वाले कई तेल के शिपमेंट रद्द कर दिए हैं. भारतीय व्यापारियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच बुक किए गए करीब 65,000 से 75,000 टन तेल के ऑर्डर रद्द कर दिए हैं.

सोयाबीन तेल आयात रद्दसोयाबीन तेल आयात रद्द
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Feb 27, 2026,
  • Updated Feb 27, 2026, 9:58 AM IST

भारत जो दुनिया का सबसे बड़ा सोयाबीन तेल खरीदार है, उसने हाल ही में दक्षिण अमेरिका से आने वाले कई तेल के शिपमेंट रद्द कर दिए हैं. इसकी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और भारतीय व्यापारियों को इससे मुनाफा कमाने का मौका मिल रहा है. भारत की बड़ी वनस्पति तेल कंपनियों में से एक पतंजलि फूड्स लिमिटेड के उपाध्यक्ष आशीष आचार्य के अनुसार, भारतीय व्यापारियों ने अप्रैल से जुलाई के बीच बुक किए गए करीब 65,000 से 75,000 टन तेल के ऑर्डर रद्द कर दिए हैं. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में व्यापारी पहले किया गया ऑर्डर रद्द कर देते हैं और वही तेल सप्लायर को ज्यादा कीमत पर वापस बेच देते हैं. इस तरह उन्हें प्रति टन करीब 40 से 60 डॉलर का सीधा फायदा हो जाता है.

बढ़ सकती है रद्द किए गए सोयाबीन तेल की मात्रा

आशीष आचार्य ने कहा कि आने वाले समय में रद्द किए गए सोयाबीन तेल की कुल मात्रा बढ़कर करीब 1 लाख से 1.20 लाख टन तक पहुंच सकती है. मतलब यह कि आगे और भी ज्यादा ऑर्डर रद्द होने की संभावना है. इसके अलावा, कई अन्य बड़े वनस्पति तेल व्यापारियों ने भी इन कदमों की पुष्टि 'ब्लूमबर्ग' से बातचीत में की है. यानी यह सिर्फ एक कंपनी या एक व्यापारी का मामला नहीं है, बल्कि पूरे बाजार में यह ट्रेंड देखने को मिल रहा है.

आगे चलकर दाम गिरने की संभावना

ऊर्जा की कीमतों में तेजी, अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की उम्मीद, और इस भरोसे कि अमेरिका में जैव ईंधन (बायोफ्यूल) मिलाने का कोटा बढ़ेगा. इन सब वजहों से शिकागो में सोयाबीन तेल के वायदा भाव (फ्यूचर प्राइस) दो साल से ज्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं दूसरी तरफ, भारतीय खरीदारों ने कई शिपमेंट इसलिए रद्द किए हैं क्योंकि उनके पास पहले से ही पर्याप्त सोयाबीन तेल का स्टॉक मौजूद है. साथ ही उन्हें उम्मीद है कि दक्षिण अमेरिका में इस साल रिकॉर्ड उत्पादन होगा, जिससे अप्रैल के आसपास बाजार में तेल की सप्लाई काफी बढ़ जाएगी. यानी आगे चलकर दाम गिरने की संभावना को देखते हुए व्यापारी अभी महंगे सौदे लेने से बच रहे हैं और पुराने ऑर्डर रद्द कर रहे हैं.

फायदे के लिए व्यापारी पुराने सस्ते सौदे कर रहे रद्द

आशीष आचार्य ने बताया कि जिन खरीदारों ने पहले सोयाबीन तेल के सौदे 1,080 से 1,100 डॉलर प्रति टन की कम कीमत पर किए थे, वे अब उन सौदों से बाहर निकल रहे हैं, क्योंकि कीमतें बढ़कर 1,140 से 1,147.50 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं. यानी दाम बढ़ने का फायदा उठाकर व्यापारी पुराने सस्ते सौदे रद्द कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण अमेरिका से तेल की भारी मांग को देखते हुए बाजार में आगे भी इसी तरह की “इनकमिंग एंड आउट” ट्रेडिंग (खरीद-बिक्री और ऑर्डर रद्द करने का खेल) जारी रहने की संभावना है.

भारत पहले भी कर चुका है सोयाबीन तेल के ऑर्डर रद्द 

भारत पहले भी कई बार सोयाबीन तेल के ऑर्डर रद्द कर चुका है. इस साल की शुरुआत में रुपये की कीमत गिरने से आयात महंगा हो गया था, जिससे तेल मंगाना घाटे का सौदा बन गया. इसी वजह से भारत ने ब्राजील और अर्जेंटीना से करीब 35,000 से 40,000 टन सोयाबीन तेल के ऑर्डर रद्द कर दिए थे. इससे पहले दिसंबर महीने में भी अर्जेंटीना के साथ 1 लाख टन से ज्यादा तेल के सौदे या तो रद्द कर दिए गए थे या फिर टाल दिए गए थे.

बाजार में सप्लाई और कीमतों में गिरावट की संभावना

कालीसुवारी इंटरकॉन्टिनेंटल के ट्रेडिंग और हेजिंग प्रमुख ज्ञानसेकर थियागराजन ने बताया कि दक्षिण अमेरिका में इस बार सोयाबीन की बंपर फसल होने की उम्मीद है, जो अप्रैल से जुलाई के बीच बाजार में आएगी. इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आने की संभावना है. उन्होंने कहा कि इसी वजह से अमेरिकी सोया तेल वायदा कीमतों में हाल की तेजी ने बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट की स्थिति को और तेज कर दिया है. सीधे शब्दों में कहें तो भारत अभी महंगे तेल खरीदने से बच रहा है, क्योंकि आगे चलकर ज्यादा सप्लाई आने से दाम गिरने की उम्मीद है, और व्यापारी इसी संभावना को देखते हुए सौदे रद्द कर रहे हैं. 

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