
खाद्य वस्तुओं की बढ़ती महंगाई ने सरकार की चिंता बढ़ा रखी है. बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने करीब 4 लाख टन गेहूं और चावल खुले बाजार में उतार दिया है. जबकि, अभी 5 लाख टन अनाज और उतारने की तैयारी चल रही है. कहा जा रहा है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह तक यह खाद्यान्न खुले बाजार में उतार दिया जाएगा.
केंद्र सरकार ने खाद्यान्न खरीद और वितरण नोडल एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (FCI) के जरिए खुले बाजार में खद्यान्न उतार रही है. खुदरा कीमतों नियंत्रित करने के प्रयास के तहत थोक उपभोक्ताओं को ई-नीलामी के जरिए इस सप्ताह 3.46 लाख टन गेहूं और 13,164 टन चावल बेचा है. पिछली बार चावल की बिक्री 3,300 मीट्रिक टन की गई थी.
26वीं ई-नीलामी में 4 लाख टन गेहूं और 1.93 लाख टन चावल की पेशकश थोक विक्रेताओं के लिए की गई थी, जिसके बाद 3.46 लाख टन गेहूं और 13,164 टन चावल थोक विक्रेताओं को बेचा गया है. गेहूं की औसत कीमत 2,178.24 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई. जबकि, चावल 2905.40 रुपये प्रति क्विंटल औसत कीमत पर बेचा गया था.
केंद्र सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के तहत खुदरा कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए अपने बफर स्टॉक से गेहूं और चावल बेच रही है. सरकार ने मार्च 2024 तक खुले बाजार बिक्री योजना के तहत बिक्री के लिए 101.5 लाख टन गेहूं आवंटित किया है.
केंद्र ने कहा है कि चावल, गेहूं और आटे की खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार गेहूं और चावल दोनों की साप्ताहिक ई-नीलामी करती रहेगी. इसके तहत अब जनवरी 2024 के दूसरे सप्ताह तक करीब 5 लाख टन गेहूं और चावल खुले बाजार में उतारने की योजना है.
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