
टमाटर या अन्य सब्जियों की तरह प्याज महंगा न हो, इसके लिए सरकार ने तैयारी कर ली है. सरकार ने पिछले साल की तुलना में इस बार बफर स्टॉक में 20 फीसद का इजाफा किया है. बफर स्टॉक का अर्थ ये होता है कि सरकार देश की जरूरतों के हिसाब से भंडारों में स्टॉक जमा रखती है. इसी स्टॉक की मदद से विपरीत परिस्थितियों में सप्लाई को सुचारू बनाया जाता है. इस बार जिस तरह से सब्जियों के रेट आसमान छू रहे हैं, उसे देखते हुए प्याज के भाव भी न बढ़ जाएं, उससे बचने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक बढ़ा दिया है. सरकार प्याज के जल्द खराब होने से भी परेशान है. इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए कुछ नए रिसर्च चलाए जा रहे हैं.
'इकोनॉमिक टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार प्याज की सेल्फ लाइफ (प्याज की उम्र) बढ़ाने के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में नया रिसर्च करा रही है. प्याज अधिक दिनों तक चले और उसे जल्द खराब होने से बचाने के लिए इररैडिएशन प्रोसेस से रिसर्च चल रही है. इसकी जानकारी उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने दी.
वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार ने बफर स्टॉक में 2.51 लाख टन प्याज का भंडार जमा रखा था. देश में इमरजेंसी की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार बफर स्टॉक जमा रखती है जिसके लिए प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड यानी कि PSF बनाया गया है. अगर किसी सब्जी या अनाज की सप्लाई घटती है तो सरकार इसी फंड की मदद से अपना बफर स्टॉक बढ़ाती है और मार्केट में सप्लाई को बढ़ाती है.
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उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने PTI को बताया कि देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है जिसे देखते हुए प्याज के बफर स्टॉक को मेंटेन किया जा रहा है. सरकार ने प्याज के बफर स्टॉक को बढ़ाकर तीन लाख टन तक पहुंचा दिया है. रोहित कुमार सिंह ने कहा कि देश में प्याज की सप्लाई को लेकर कोई दिक्कत नहीं है.
सरकार अभी रबी सीजन का प्याज खरीद रही है और उसी से बफर स्टॉक जमा कर रही है. दूसरी ओर देश में खरीफ प्याज की बुआई चल रही है जिसकी उपज अक्टूबर में मार्केट में आना शुरू होगी. ऐसा देखा जाता है कि खरीफ सीजन का प्याज आने के 15-20 दिन पहले भाव में तेजी रहती है. लेकिन सरकार ने इस बार पहले ही तैयारी कर ली है और बफर स्टॉक जमा कर लिया है.
दूसरी ओर सरकार प्याज की उम्र बढ़ाने के लिए रिसर्च पर फोकस कर रही है. इसके लिए BARC में प्याज पर इररैडिएशन प्रोसेस से रिसर्च चल रही है. रिसर्च में इस बात की टेस्टिंग चल रही है कि कम सप्लाई के समय प्याज को कैसे अधिक से अधिक सुरक्षित बनाया जाए ताकि उपज खराब न हो. इसके लिए महाराष्ट्र के लासलगांव में 150 टन प्याज को गामा रैडिएशन प्रोसेस से कोबाल्ट-60 के जरिये रैडिएशन दिया जा रहा है. इससे प्याज को जल्द खराब होने से बचाया जा सकेगा.
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साल 2022-23 में सरकार ने रबी सीजन के 2.51 लाख मीट्रिक टन प्याज की खरीद की थी. यह खरीद रबी सीजन के प्याज की थी. इस प्याज को सरकार ने सितंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच देश के अलग-अलग सेंटर से बिक्री कराए. आपको बता दें कि भारत में कुल खपत का 65 फीसद प्याज रबी सीजन का होता है जिसकी खुदाई अप्रैल से जून के बीच में होती है. यह प्याज अक्टूबर-नवंबर तक चलता है जिस समय बाजार में खरीफ सीजन का प्याज आता है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 15 जुलाई में देश में प्याज का औसत भाव 26.79 रुपये किलो था. इस साल अभी तक का आंकड़ा देखें तो प्याज का भाव 65 रुपये और कम से कम 10 रुपये प्रति किलो तक रहा है.