
बिहार में सितंबर के आखिरी सप्ताह में चक्रवात अर्णव के असर से हुई तेज बारिश, आंधी और जलभराव ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. धान, मक्का, गन्ना, सब्जियों और केले-पपीते जैसी बागवानी फसलों को कई इलाकों में नुकसान पहुंचा है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, बारिश रुकने के बाद भी फसलों पर इसका असर कुछ दिनों तक दिखाई दे सकता है. ऐसे में किसानों को अभी से फसल और खेत की निगरानी शुरू कर देनी चाहिए. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रोफेसर डॉ. एस.के. सिंह के मुताबिक, जिन खेतों में पानी आसानी से निकल गया है, वहां बारिश फसलों के लिए फायदेमंद हो सकती है. लेकिन निचले इलाकों और जिन खेतों में पानी जमा है, वहां नुकसान ज्यादा हो सकता है.
तेज हवा और बारिश से तैयार मक्का और गन्ने की फसल गिर सकती है. वहीं, धान की खड़ी फसल भी जमीन पर गिरने की स्थिति में पहुंच सकती है. अगर धान में दाने भरने या पकने का समय है और खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहता है, तो दानों की क्वालिटी खराब हो सकती है. ज्यादा देरी होने पर दाने अंकुरित या सड़ भी सकते हैं, इसलिए मौसम साफ होते ही तैयार फसल की कटाई में देरी नहीं करनी चाहिए.
जलभराव से सब्जियों की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती. इससे जड़ और तने में सड़न शुरू हो सकती है. टमाटर, मिर्च, बैंगन, कद्दूवर्गीय सब्जियां और नर्सरी के पौधे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जो पौधे पूरी तरह खराब हो गए हैं, उन्हें खेत में छोड़ने के बजाय निकालकर उचित तरीके से नष्ट करना चाहिए. इसके अलावा बारिश और जलभराव से केला और पपीते के पौधों को भी नुकसान हो सकता है. केले की जड़ें कमजोर होने से पौधे पीले पड़ सकते हैं और तेज हवा में गिर सकते हैं. पपीते के पौधे लंबे समय तक पानी में रहने को ज्यादा सहन नहीं कर पाते, इसलिए इन फसलों में पानी निकलने के बाद जड़ों और तने की स्थिति जरूर देखें.
जिन किसानों की फसल को नुकसान हुआ है, उन्हें खेत की फोटो और वीडियो सुरक्षित रखनी चाहिए. साथ ही फसल का क्षेत्रफल, नुकसान और खेत में कितने समय तक पानी जमा रहा, इसका रिकॉर्ड भी रखें. इससे फसल नुकसान के सर्वे और सरकारी सहायता के लिए जानकारी देने में मदद मिल सकती है. अगर खरीफ की फसल पूरी तरह खराब हो गई है, तो खेत को खाली छोड़ने के बजाय स्थानीय मौसम और खेत की स्थिति देखकर कम अवधि वाली रबी फसल या सब्जियों की खेती की योजना बनाई जा सकती है.
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, चक्रवात के बाद किसानों के लिए सबसे जरूरी है. पहले खेत से पानी निकालें, फिर फसल की जांच करें और उसके बाद खाद और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें. जलभराव के बाद कुछ बीमारियां कई दिनों बाद दिखाई दे सकती हैं, इसलिए अगले 2 से 4 हफ्तों तक फसल की लगातार निगरानी करना जरूरी है.