
सेंट्रल सुपारी और कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव (CAMPCO) पिछले पांच सालों से किसानों को स्थिर और फायदेमंद दाम दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है. कैम्पको के प्रेसिडेंट किशोर कुमार कोडगी के मुताबिक, अस्थिर बाज़ार, गैर-कानूनी इंपोर्ट और टैक्स चोरी जैसी चुनौतियों के बावजूद संगठन ने पूरे साल किसानों की मदद की है.
बीते पांच सालों में सफेद सुपारी के दामों में बड़ी तेजी देखी गई है.
नई सफेद सुपारी
2020 में दाम 240-320 रुपये किलो था, जो 2025 में बढ़कर 360-485 रुपये किलो हो गया.
पुरानी सफेद सुपारी
2020 में 320-380 रुपये किलो थी, जो 2025 में बढ़कर ₹360-525 रुपये किलो पहुंच गई.
2020 में लाल सुपारी का दाम 350-398 रुपये किग्रा था, जो 2025 में 545-585 रुपये तक पहुंच गया. यह किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है.
अवैध आयात और GST-चोरी करने वाले प्राइवेट व्यापारियों की वजह से सुपारी बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आया, लेकिन कैंप्को ने हर चुनौती में किसानों का साथ दिया और उनके उत्पादों को उचित मूल्य दिलाया.
पिछले पांच वर्षों में कर्नाटक और केरल में सुपारी पर पीला पत्ता रोग और लीफ स्पॉट रोग बढ़ा. कैंप्को ने वैज्ञानिकों, संस्थानों और किसान समूहों के साथ मिलकर इसके कारणों की जांच की और समाधान खोजे.
कुछ व्यापारी अलग-अलग HSN कोड का उपयोग कर भुनी सुपारी का आयात कर रहे थे, जिससे बाजार में दाम गिर रहे थे. कैंप्को की पहल पर सरकार ने आयात नियम बदले:
कैंप्को ने Saksham ERP सिस्टम लॉन्च किया, जिसे अप्रैल 2024 में लागू किया गया. अब कैंप्को एक मोबाइल ऐप लाने जा रहा है, जिसमें किसानों को मिलेगा:
यह ऐप किसानों के लिए एक बड़ा डिजिटल सहयोग होगा. कैंप्को ने पिछले पांच वर्षों में यह साबित किया है कि सही प्रबंधन और किसानों के हित में उठाए गए कदम कैसे पूरे उद्योग को स्थिर कर सकते हैं. सुपारी किसानों को अच्छा दाम, वैज्ञानिक समाधान और डिजिटल सहायता- कैंप्को हर कदम पर किसानों के साथ खड़ा है.
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