पांच साल में सुपारी के दामों में रिकार्ड उछाल- कैंप्को बना किसानों का सबसे बड़ा सहारा

पांच साल में सुपारी के दामों में रिकार्ड उछाल- कैंप्को बना किसानों का सबसे बड़ा सहारा

पिछले पांच सालों में, कैम्पको ने सुपारी किसानों को स्थिर और फ़ायदेमंद दाम देकर उनकी इनकम में काफ़ी बढ़ोतरी की है. गैर-कानूनी इम्पोर्ट और मार्केट में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बावजूद, संगठन ने किसानों की मदद की है. सफ़ेद और लाल सुपारी, दोनों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है.

सुपारी के दामों में रिकॉर्ड उछालसुपारी के दामों में रिकॉर्ड उछाल
क‍िसान तक
  • Noida ,
  • Nov 30, 2025,
  • Updated Nov 30, 2025, 11:03 AM IST

सेंट्रल सुपारी और कोको मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कोऑपरेटिव (CAMPCO) पिछले पांच सालों से किसानों को स्थिर और फायदेमंद दाम दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है. कैम्पको के प्रेसिडेंट किशोर कुमार कोडगी के मुताबिक, अस्थिर बाज़ार, गैर-कानूनी इंपोर्ट और टैक्स चोरी जैसी चुनौतियों के बावजूद संगठन ने पूरे साल किसानों की मदद की है.

सफेद सुपारी के दाम में बड़ा बढ़ोतरी

बीते पांच सालों में सफेद सुपारी के दामों में बड़ी तेजी देखी गई है.

नई सफेद सुपारी
2020 में दाम 240-320 रुपये किलो था, जो 2025 में बढ़कर 360-485 रुपये किलो हो गया.

पुरानी सफेद सुपारी
2020 में 320-380 रुपये किलो थी, जो 2025 में बढ़कर ₹360-525 रुपये किलो पहुंच गई.

लाल सुपारी के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

2020 में लाल सुपारी का दाम 350-398 रुपये किग्रा था, जो 2025 में 545-585 रुपये तक पहुंच गया. यह किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है.

अस्थिर बाजार में भी किसानों का साथ

अवैध आयात और GST-चोरी करने वाले प्राइवेट व्यापारियों की वजह से सुपारी बाजार में काफी उतार-चढ़ाव आया, लेकिन कैंप्को ने हर चुनौती में किसानों का साथ दिया और उनके उत्पादों को उचित मूल्य दिलाया.

टर्नओवर में 70 फीसद तक बढ़ोतरी

  • कैंप्को का टर्नओवर 2020-21 में 2,134 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 3,631 करोड़ रुपये हो गया.
  • पिछले पांच साल में कैंप्को ने लगभग 210 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है.
  • यह किसानों के भरोसे और संगठन की मजबूती को दिखाता है.

रोगों से लड़ने के लिए तैयार

पिछले पांच वर्षों में कर्नाटक और केरल में सुपारी पर पीला पत्ता रोग और लीफ स्पॉट रोग बढ़ा. कैंप्को ने वैज्ञानिकों, संस्थानों और किसान समूहों के साथ मिलकर इसके कारणों की जांच की और समाधान खोजे.

आयात नीति में बदलाव

कुछ व्यापारी अलग-अलग HSN कोड का उपयोग कर भुनी सुपारी का आयात कर रहे थे, जिससे बाजार में दाम गिर रहे थे. कैंप्को की पहल पर सरकार ने आयात नियम बदले:

  • ITC (HS) कोड 08028090 और 20081920 के तहत भुनी सुपारी का आयात अब प्रतिबंधित
  • केवल वही भुनी सुपारी आयात हो सकती है जिसकी कीमत 351 रुपये किलो या उससे अधिक हो
  • इससे न्यूनतम आयात मूल्य 251 से बढ़कर 351 रुपये प्रति किलो हो गया- इससे देश के किसानों को सीधा फायदा मिला.

भविष्य की परियोजनाओं के लिए भूमि खरीदी

  • कैंप्को ने नई परियोजनाओं के लिए हेबरी, विट्टल, कदबा, अलंकार और पुत्तूर में जमीन खरीदी है.
  • कुल 40 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी गई और लगभग 17 करोड़ रुपये निर्माण और मरम्मत पर खर्च किए गए.

डिजिटल पहल- कैंप्को सक्षम ERP और मोबाइल ऐप

कैंप्को ने Saksham ERP सिस्टम लॉन्च किया, जिसे अप्रैल 2024 में लागू किया गया. अब कैंप्को एक मोबाइल ऐप लाने जा रहा है, जिसमें किसानों को मिलेगा:

  • रियल-टाइम दाम
  • फसल देखभाल की जानकारी
  • विशेषज्ञ सलाह

यह ऐप किसानों के लिए एक बड़ा डिजिटल सहयोग होगा. कैंप्को ने पिछले पांच वर्षों में यह साबित किया है कि सही प्रबंधन और किसानों के हित में उठाए गए कदम कैसे पूरे उद्योग को स्थिर कर सकते हैं. सुपारी किसानों को अच्छा दाम, वैज्ञानिक समाधान और डिजिटल सहायता- कैंप्को हर कदम पर किसानों के साथ खड़ा है.

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