
राजस्थान के धौलपुर जिले में मौसम विभाग के अलर्ट के बाद जिले में दो दिन से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. आंधी अंधड़ से किसान सहमा हुआ है. शनिवार शाम को तेज बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की सांसें थम सी गई हैं. बारिश और ओलावृष्टि से किसानों के खेतों में खड़ी गेहूं फसल में करीब पचास फीसदी नुकसान की संभावना है. खेतों में गेहूं की फसल भीग जाने से गिर गई है और कटी फसल भी भीग गई है. साथ ही धनिया, टमाटर, बैंगन, गाजर, गोभी आदि फसलों में भी नुकसान हुआ है.
धौलपुर जिले में शनिवार दोपहर बाद आसमान में घने काले बादल छा गए और शाम करीब 5 बजे के आसपास तेज गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश का दौर शुरू हो गया. उसके बाद हुई ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. जिनकी गेहूं की फसल कट चुकी थी और खेतों में सुखाने के लिए रखी हुई थी, उसमें सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. इससे अब अनाज की क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है.
किसानों को अब अपनी मेहनत की फसल बचाने की चिंता सता रही है. बेमौसम बारिश गेहूं की फसल के लिए मुश्किल पैदा कर रही है क्योंकि कटाई के बाद फसल को सूखने के लिए खेत में रखा जाता है. नमी से फसल में फंगस या अंकुरण का खतरा बढ़ सकता है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. दस फीसदी खेतों में कटने के लिए खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है जिससे किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
किसान बनवारी, जगदीश और सरपंच दिनेश त्यागी ने बताया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल में करीब पचास फीसदी नुकसान है. किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल भीगने से खेतों में पसर गई है और कटी फसल पूरी तरह भीग गई है. किसानों ने बताया कि रबी फसल के दौरान मौसम में उतार चढ़ाव लगातार बना रहा है जिससे उत्पादन पर काफी असर पड़ा है. ऊपर से अब बारिश और ओलावृष्टि होने अत्यधिक नुकसान की आशंका बनी हुई है.
गेहूं के साथ सरसों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है. किसानों ने बताया कि सरसों में रोग लगने से पैदावार कम हुई थी और अब बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं में भी पैदावार कम होगी. बारिश के बाद गेहूं की बालियों में दाना सड़ जाएगा या फिर अंकुरित हो जाएगा. मौसम विभाग ने सात और आठ अप्रैल को फिर बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है तो इस भीगी फसल के सूखने की संभावना भी कम है.
किसानों ने बताया कि बीते दो साल से मॉनसूनी सीजन में अधिक बारिश के कारण खेत जल मग्न हो गए थे और खरीफ की फसल नष्ट हो गई थी. इस बार भी उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है और मौसम की बेरुखी और फसलों में फैलते रोगों ने उनकी कमर तोड़ दी है. किसानों ने सरकार से जल्द गिरदावरी करा कर मुआवजा देने की मांग की है. किसानों ने बताया कि पिछले साल भी गिरदावरी हुई, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं मिला है.
खेतों के अलावा कृषि उपज मंडी में भी फसलों का नुकसान हुआ है जो बिक्री के लिए रखी गई थी. मंडी में खुले में रखा किसानों का अनाज भीग गया. इस तरह सालभर के खून पसीने की कमाई बरसात में बर्बाद होते देख अन्नदाता बुरी तरह सहम गया है.(उमेश मिश्रा का इनपुट)