जालना में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि ने बरपाया कहर, फलों का बाग तबाह! किसान को लाखों का नुकसान

जालना में आंधी-बारिश और ओलावृष्टि ने बरपाया कहर, फलों का बाग तबाह! किसान को लाखों का नुकसान

जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बागान किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. गाढेसावरगांव के किसान भागवत डोंगरे की केले, तरबूज और मौसंबी की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है. उत्पादन घटने और दाम गिरने से लाखों रुपये के नुकसान का अंदेशा है.

Jalna Crop LossJalna Crop Loss
क‍िसान तक
  • Jalna,
  • Apr 03, 2026,
  • Updated Apr 03, 2026, 8:30 PM IST

महाराष्ट्र के जालना जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने फल बागान किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. गाढेसावरगांव के किसान भागवत डोंगरे को इस आपदा का सबसे बड़ा झटका लगा है, जहां उनकी केले, तरबूज और मौसंबी की फसल को भारी नुकसान हुआ है. इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान आर्थिक संकट में फंस गया है और सरकार से तत्काल मदद की मांग की है. किसान भागवत डोंगरे के पास कुल 7 से 8 एकड़ में फल बागान है, जिसमें 2 एकड़ में केले, 3 एकड़ में तरबूज और 2 एकड़ में मौसंबी की खेती की गई थी. लेकिन अचानक आई तेज बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने उनकी फसलों को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है. सबसे ज्यादा नुकसान केले की फसल को हुआ है. 

केले के 400-500 पेड़ उखड़े

किसान ने करीब 2 एकड़ में लगभग 2800 से 3000 केले के पेड़ लगाए थे. लेकिन तेज हवाओं और बारिश के कारण करीब 400 से 500 पेड़ उखड़ गए या टूट गए. जो पेड़ खड़े हैं, उनके पत्ते फट गए हैं, जिससे पेड़ो की पोषण प्रक्रिया प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा और पहले जहां 40 से 50 किलो का एक गुच्छा तैयार होता था, अब वह घटकर करीब 20 किलो तक रह जाने की आशंका है. 

4-6 टन कम पैदावार की आशंका

भागवत डोंगरे ने कहा कि इस नुकसान से करीब 4 से 6 टन केले की पैदावार कम हो सकती है. केले की खेती में लगभग ढाई लाख रुपये का खर्च आया था और 7 से 8 लाख रुपये की आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अब उत्पादन और दाम दोनों में गिरावट से बड़ा नुकसान हुआ है. वहीं, तरबूज की फसल भी ओलावृष्टि की मार से नहीं बच सकी.

ओले पड़ने से तरबूज की फसल पर असर

3 एकड़ में लगाए गए तरबूज पर ओले पड़ने के कारण गहरे निशान पड़ गए हैं और उनके डंठल कमजोर हो गए हैं, जिससे फल समय से पहले ही टूटकर गिर रहे हैं. पहले जहां तरबूज का वजन 4 से 5 किलो होता था, अब वह घटकर 2 से 2.5 किलो रह गया है. गुणवत्ता खराब होने के कारण बाजार में भाव भी गिर गए हैं. 

बाजार में कम मिल रहा तरबूज का भाव

भागवत को जहां 15 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने की उम्मीद थी, वहीं अब केवल 5 रुपये प्रति किलो यानी करीब 5 हजार रुपये प्रति टन का भाव मिल रहा है. तरबूज की खेती में करीब 2 लाख रुपये का खर्च हुआ था, लेकिन अब सिर्फ डेढ़ लाख रुपये की ही आमदनी होने की संभावना है, जिससे लागत भी निकलना मुश्किल हो गया है. 

इसके अलावा, मौसंबी की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है. किसान ने 2 एकड़ में लगभग 300 मौसंबी के पेड़ लगाए थे. इस फसल पर करीब डेढ़ लाख रुपये का खर्च आया था और 3 से 4 लाख रुपये की आय की उम्मीद थी. लेकिन ओलावृष्टि के कारण करीब 50 प्रतिशत फल पेड़ों से गिर गए, जिससे आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है. 

4-5 लाख के नुकसान का अनुमान

किसान भागवत डोंगरे ने आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के चलते करीब 4 से 5 लाख रुपये के नुकसान की बात कही है. पहले से ही बाजार में फलों के दाम कम मिलने और निर्यात प्रभावित होने की वजह से किसान परेशान हैं. ऐसे में इस आपदा ने उनकी स्थिति और भी खराब कर दी है. पीड़ित किसान ने सरकार से मांग की है कि तुरंत नुकसान का पंचनामा किया जाए और कम से कम खेती की लागत के बराबर मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें इस आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके. (गौरव विजय साली की रिपोर्ट)

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