Bamboo Farming: महाराष्ट्र में बैंबू फार्मिंग को मिलेगा बढ़ावा, बांस के उत्‍पादों की कीमत फिक्‍स करने पर हो रहा विचार

Bamboo Farming: महाराष्ट्र में बैंबू फार्मिंग को मिलेगा बढ़ावा, बांस के उत्‍पादों की कीमत फिक्‍स करने पर हो रहा विचार

महाराष्ट्र सरकार बांस की खेती और उससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बना रही है. अटल बांस समृद्धि योजना के तहत किसानों को आर्थिक मदद दी जा रही है और बांस उत्पादों के लिए बाजार समर्थन की तैयारी भी है. इससे ग्रामीण रोजगार और पारंपरिक कारीगरों को नई ताकत मिलने की उम्मीद है.

महाराष्ट्र की बांस नीति से किसानों को फायदामहाराष्ट्र की बांस नीति से किसानों को फायदा
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 04, 2026,
  • Updated Mar 04, 2026, 7:28 PM IST

महाराष्ट्र सरकार राज्य में बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में नई पहल कर रही है. विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान वन मंत्री गणेश नाइक ने ने कहा कि बांस की खेती को बढ़ावा देकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं. इससे पारंपरिक कारीगरों की आजीविका को सहारा मिल सकता है और प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल का विकल्प भी तैयार किया जा सकता है. उन्‍होंने बताया कि सरकार बांस से बने उत्पादों के लिए खरीद दर तय करने की संभावना पर विचार कर रही है, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे और किसानों और कारीगरों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिल सके.

राज्‍य में बांस की खेती की अच्‍छी संभावना: वन मंत्री

मंत्री नाइक ने कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में अब बांस की खेती की संभावनाएं बेहतर हो गई हैं. कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तर-पश्चिम के खंडेश क्षेत्र में किसान बड़े पैमाने पर बांस की खेती कर सकते हैं. सरकार विशेष रूप से कोंकण क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाकर किसानों को इस खेती की ओर आकर्षित करने की योजना बना रही है.

बांस की खेती पर सब्सिडी देती है राज्‍य सरकार

राज्य में किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए अटल बांस समृद्धि योजना लागू की गई है. इस योजना के तहत बांस की खेती के लिए एक से तीन वर्ष तक आर्थिक सहायता दी जाती है. करीब 1.5 हेक्टेयर क्षेत्र में बांस की खेती से किसान लगभग 7 लाख रुपये तक आय प्राप्त कर सकते हैं. बेहतर उत्पादन के लिए टिशू कल्चर तकनीक से तैयार उच्च गुणवत्ता वाले पौधे भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं.

तीसरा सबसे बड़ा बांस उत्‍पादक है महाराष्‍ट्र

महाराष्ट्र देश का तीसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक राज्य है और प्रदेश सरकार को भरोसा है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की क्षमता मौजूद है. नई किस्मों के बांस अब लगभग 60 फीट तक बढ़ रहे हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ बांस आधारित हस्तशिल्प और उद्योगों को भी मजबूती मिल सकती है.

पिछले वर्षों में सस्ते प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से बांस उत्पादों की मांग घटने लगी थी, जिसका असर पारंपरिक कारीगरों पर पड़ा. विशेष रूप से बुरुड समुदाय, जो बांस से चटाई, फर्नीचर और घरेलू उपयोग की वस्तुएं बनाता है, उसकी आजीविका प्रभावित हुई है. सरकार अब इन पारंपरिक उद्योगों को फिर से सक्रिय करने पर जोर दे रही है.

इसी दिशा में चंद्रपुर और गढ़चिरौली जैसे जिलों में बांस प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां अब तक करीब 17 हजार लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को बांस आधारित उद्योगों से जोड़कर स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए.

महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम ने की पहल

बांस उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम ने भी पहल की है. इसके तहत बांस आधारित उद्योग लगाने वाली इकाइयों को 10 करोड़ रुपये तक का लोन उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. राज्य में बांस से बने फर्नीचर, हस्तशिल्प, कंपोजिट सामग्री, ऊर्जा और चारकोल जैसे उत्पादों के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा.

सरकार भविष्य में सरकारी कार्यालयों के फर्नीचर में कम से कम 10 प्रतिशत बांस के उपयोग की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है. इसके साथ ही होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी बांस उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना है.

पारंपरिक कारीगरों की कला को संरक्षित रखने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं. बुजुर्ग शिल्पकारों को मानदेय देने और युवाओं को प्रशिक्षण देकर इस कला को आगे बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है.

विधानसभा में चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने यह सुझाव भी दिया कि ग्राम पंचायतों, वन विभाग और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से वन भूमि पर बड़े पैमाने पर बांस रोपण को बढ़ावा दिया जा सकता है. (पीटीआई)

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