
ओडिशा में इस बार अलग-अलग जिलों में बारिश का अलग-अलग पैटर्न देखने के लिए मिला है, इसके कारण जहां कुछ जिलों में पानी की कमी देखी गई है वहीं कुछ जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात हुए. दोनों की स्थिति में फसलों को नुकसान हुआ है और इसका असर किसानों पर पड़ा है. बाढ़ के कारण कई किसानों की फसल तबाह हुई इससे उनके सपने टूट गए. जो किसान कल तक बेहतर फसल और अच्छी कमाई की उम्मीद कर रहे थे वहीं किसान फसल बर्बाद होने के बाद मजदूरी करने के लिए शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं.
कटक मे बिल्डिंग मजदूर के तौर पर काम करने वाले किशोर स्वैन ने बताया कि किस तरह से कुछ हफ्तों में ही भारी बारिश और बाढ़ के कारण उनका जीवन बदल गया. किशोर ने अपने तीन एकड़ के खेत में विभिन्न प्रकार के सब्जियों की खेती की थी. उन्हें पूरी उम्मीद थी कि इस बार अच्छी फसल होगी और इससे उन्हें अच्छी कमाई होगी. पर महानदी में बढ़े जलस्तर ने किशोर की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. उफनती नदी ने उनके पूरे खेत को जलमग्न कर दिया और उनकी पूरी फसल को बर्बाद कर दिया.
किशोर ने बताया कि वह हर दिन सुबह साढ़े छह बजे अपनी पत्नी के साथ घर से काम करने के लिए जाते हैं, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक वह वह खुर्दा जिले के जाटनी में मजदूरी करने के लिए वाहन से यात्रा करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने तीन एक़ड़ में खेती करने के लिए 30,000 रुपये का निवेश किया था. पर फसल नुकसान होने के बाद छह सदस्यों वाले परिवार का भरण पोषण करने के लिए उनके पास मजदूरी करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा. हालांकि किशोर अकेले ऐसे युवा नहीं हैं जो इस तरह की कठिन परिस्थियों का समाना कर रहे हैं. ओडिशा के तटीय जिलों में कई ऐसे किसान हैं जो मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं.
किसान तक से बात करते हुए ओडिशा के मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक उमा शंकर दास ने बताया कि बाढ़ के कारण हाल ही में दामपाड़ा प्रखंड की 17 ग्राम पंचायतें प्रभावित हुई है. इसके अलावा अन्य प्रखंड के कई इलाकों में कृषि भूमि को काफी नुकसान हुआ है. बाढ़ का पानी दो सप्ताह से अधिक समय के बाद भी, तालाबबस्ता, शिमिलीपुर, हरिराजपुर, बिलीपाड़ा, कुसापंगी, पाठापुर, रतागढ़, सुबरनापुर, कदलीबाड़ी, ओस्टिया, कांटापहांरा, बंदाल ग्राम पंचायतों में सैकड़ों एकड़ खेतों में अभी तक कम नहीं हुआ है. इन इलाकों के किसानों के पास अब कोई काम नहीं है इसलिए आजीविका के लिए अपने नजदीकी जिलों में पलायन कर रहे हैं.
उमा शंकर दास ने बताया कि ओडिशा में बारिश की जो अलग-अलग तस्वीरें नजर आ रही है उसे जलवायु परिवर्तन नहीं कहा जा सकता है. पिछले कुछ साल से देखा जा रहा है कि बारिश के वितरण में अनियमितता आ रही है. इसके अलावा कई कारण है जो बारिश को प्रभावित करते हैं. प्रदेश के 11 जिले ऐसे हैं जहां पर सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. यहां के जो तटीय इलाकों में मौजूद खुर्दा और गंजम समेत अन्य जिलों में अच्छी बारिश हुई है, जबकि नबरंगपुर और कालाहांडी जैसे जिलों में बारिश की कमी देखी गई है.नबरंगपुर में बारिश के आंकड़े कम इसलिए हैं क्योंकि वहां सामान्य बारिश ही अधिक होती है.