
हरियाणा में फसलों की सरकारी खरीद के नियमों को लेकर सियासत तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे खरीद करने के बजाय किसानों पर नई-नई शर्तें थोपी जा रही हैं, जिससे मंडियों में हालात बिगड़ रहे हैं. पूर्व सीएम ने कहा कि राज्यभर से किसानों की लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मंडियों में अव्यवस्था का माहौल है. फसल बेचने के लिए किसानों को पोर्टल रजिस्ट्रेशन, गेट पास, गारंटर, बायोमेट्रिक सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं से गुजरना पड़ रहा है. इन प्रक्रियाओं के कारण किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है.
नेता विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार गेहूं और सरसों की खरीद को आसान बनाने के बजाय रोज नई शर्तें जोड़ रही है. इससे किसानों को मजबूरी में मंडियों के बाहर कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ सकती है, जो MSP से नीचे होती है.
हुड्डा ने कहा कि एक तरफ सरकारी नीतियों की जटिलता है तो दूसरी तरफ बेमौसम बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है. ऐसे में सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी कराकर नुकसान का आकलन करना चाहिए और प्रभावित किसानों को मुआवजा देना चाहिए.
भूपेंद्र हुड्डा ने मांग की कि MSP के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त बोनस भी दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके. साथ ही मंडियों में व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर गैर-जरूरी शर्तों को हटाने और खरीद प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत बताई.
हुड्डा ने रोहतक जिले की सांपला अनाज मंडी का दौरा कर किसानों, मजदूरों और आढ़तियों से बातचीत की. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में वह राज्य की विभिन्न मंडियों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को समझेंगे और सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाएंगे.
इसके लिए कांग्रेस विधायकों को भी अपने-अपने क्षेत्रों की मंडियों में जाने के निर्देश दिए गए हैं. हुड्डा ने कहा कि नारायणगढ़, सढौरा, बराड़ा, अंबाला, पिपली और करनाल सहित कई मंडियों में जाकर किसानों से सीधा संवाद किया जाएगा, ताकि उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाया जा सके. (पीटीआई)