
छत्तीसगढ़ में मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही खरीफ सीजन की खेती ने रफ्तार पकड़ ली है. राज्य में अब तक 33.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है, जो इस वर्ष निर्धारित 48.69 लाख हेक्टेयर लक्ष्य का 69 प्रतिशत है.धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई तेजी से जारी है.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी मांग के अनुसार प्रमाणित खाद और बीज समय पर उपलब्ध कराया जाए.उन्होंने साफ कहा है कि वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. साथ ही सभी सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज का भंडारण सुनिश्चित करने और लगातार निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं. कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग इस पूरी व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है.
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ सीजन में अब तक किसानों को 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 4.12 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित किए जा चुके हैं.
बीज निगम ने इस वर्ष 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा है.इसके मुकाबले 4.70 लाख क्विंटल बीज का भंडारण किया गया और अब तक 4.12 लाख क्विंटल बीज किसानों तक पहुंच चुका है, जो मांग का लगभग 83 प्रतिशत है.
वहीं उर्वरक वितरण के लिए 15.55 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य तय किया गया है. इसके विरुद्ध 14.57 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया गया, जिसमें से 9.22 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है. यह कुल लक्ष्य का करीब 59 प्रतिशत है.
22 जुलाई की सुबह तक प्रदेश में 389.7 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले 10 वर्षों के आधार पर इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा 421.5 मिमी है. राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी मानी जाती है. बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने के बावजूद किसानों ने तेजी से खेतों में बुवाई का काम पूरा किया है.
राज्य सरकार किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है. 21 जुलाई 2026 तक किसानों को ₹6633.71 करोड़ का कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह राशि ₹5560.34 करोड़ थी. इस वर्ष सरकार ने ₹8800 करोड़ कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य रखा है.
कृषि विभाग का कहना है कि मानसून की अच्छी प्रगति के साथ आने वाले दिनों में बोनी का रकबा और बढ़ेगा तथा किसानों को खाद, बीज और ऋण की उपलब्धता लगातार सुनिश्चित की जाएगी.