बिहार में खरीफ मक्का की बंपर बुवाई, कई जिलों ने टारगेट से अधिक खेती कर रचा रिकॉर्ड

बिहार में खरीफ मक्का की बंपर बुवाई, कई जिलों ने टारगेट से अधिक खेती कर रचा रिकॉर्ड

बिहार में खरीफ मक्का की खेती इस साल किसानों के बीच काफी लोकप्रिय साबित हुई है. राज्य में 2.70 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 2.55 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है, जिससे 94 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया गया है. पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बेगूसराय, सीवान समेत कई जिलों ने लक्ष्य के बराबर या उससे अधिक क्षेत्र में मक्के की खेती दर्ज की है.

क्यों फायदे का सौदा है मक्का की खेती? क्यों फायदे का सौदा है मक्का की खेती?
रवि कांत सिंह
  • New Delhi/Patna,
  • Aug 11, 2026,
  • Updated Aug 11, 2026, 4:58 PM IST

बिहार में खरीफ सीजन के दौरान मक्का की खेती लगातार बढ़ती जा रही है. राज्य के किसानों का रुझान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ मक्के की ओर तेजी से बढ़ रहा है. बेहतर बाजार, पशु आहार उद्योग की बढ़ती मांग और इससे अधिक आय की संभावना के चलते इस साल भी किसानों ने बड़े पैमाने पर खरीफ मक्का की बुवाई की है. राज्य के कई जिलों ने निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लिया है, जबकि कुछ जिलों ने लक्ष्य से अधिक क्षेत्र में खेती कर नया रिकॉर्ड बनाया है.

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में खरीफ मक्का की खेती के लिए 2 लाख 70 हजार 289 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसके मुकाबले 2 लाख 55 हजार 159 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी की जा चुकी है. इस तरह राज्य ने कुल लक्ष्य का 94 प्रतिशत हासिल कर लिया है.

सीमांचल और कोसी क्षेत्र बने मक्का के प्रमुख केंद्र

बिहार के सीमांचल और कोसी इलाके लंबे समय से मक्का उत्पादन के लिए जाने जाते हैं. इस साल भी इन क्षेत्रों के किसानों ने मक्का की खेती में विशेष दिलचस्पी दिखाई है.

पूर्णिया जिले में 51,644 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 51,373 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती दर्ज की गई, जो लगभग 99 प्रतिशत उपलब्धि है. वहीं कटिहार ने 43,102 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 42,968 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई कर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है.

अररिया में 5,819 हेक्टेयर लक्ष्य के खिलाफ 5,712 हेक्टेयर, जबकि किशनगंज में 828 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 828 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई पूरी की गई है. इससे स्पष्ट है कि सीमांचल क्षेत्र आज भी बिहार के मक्का उत्पादन का सबसे मजबूत केंद्र बना हुआ है.

कई जिलों ने लक्ष्य से अधिक हासिल की उपलब्धि

इस बार कुछ जिलों ने कृषि विभाग द्वारा तय लक्ष्य से अधिक क्षेत्र में खेती कर बड़ा नाम किया है.

  • सीवान : 11,555 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 11,635 हेक्टेयर, उपलब्धि 101%
  • बेगूसराय : 7,715 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 7,821 हेक्टेयर, उपलब्धि 101%
  • मधेपुरा : 31 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 40 हेक्टेयर, उपलब्धि 129%
  • वैशाली : 8,660 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 8,671 हेक्टेयर, उपलब्धि 100%

इन जिलों की सफलता यह दिखाती है कि किसान मक्का को लाभकारी फसल मानते हुए खेती का रकबा बढ़ा रहे हैं.

पटना, भोजपुर और बक्सर का भी अच्छा रोल

राजधानी पटना में 4,592 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 4,440 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई, जो 97 प्रतिशत उपलब्धि है. भोजपुर ने 5,176 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 4,278 हेक्टेयर और बक्सर ने 3,292 हेक्टेयर लक्ष्य के खिलाफ 3,236 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती दर्ज की है.

इसी तरह रोहतास, भभुआ, सारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण में भी मक्का की बुवाई बेहतर स्तर पर रही है.

कुछ जिलों में लक्ष्य से पीछे रही खेती

हालांकि राज्य के अधिकांश जिलों में प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में लक्ष्य के मुताबिक बुवाई नहीं हो सकी.

जहानाबाद : 1,066 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 477 हेक्टेयर (45%)
सीतामढ़ी : 398 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 183 हेक्टेयर (46%)
मुंगेर : 957 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 537 हेक्टेयर (56%)
लखीसराय : 136 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 87 हेक्टेयर (64%)
भभुआ : 712 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 523 हेक्टेयर (73%)

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ इलाकों में बारिश का अंतर, वैकल्पिक फसलों की ओर झुकाव और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के कारण लक्ष्य प्रभावित हुआ है.

किसानों का बढ़ रहा भरोसा

कृषि जानकारों के अनुसार बिहार देश के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. राज्य में पोल्ट्री उद्योग, स्टार्च उद्योग, पशु आहार और इथेनॉल क्षेत्र की बढ़ती मांग ने मक्के की फसल को किसानों के लिए आकर्षक बना दिया है. यही कारण है कि हर साल खेती का रकबा बढ़ रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहा और किसानों को उचित बाजार मूल्य मिला तो इस साल बिहार में मक्का उत्पादन का आंकड़ा नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

प्रमुख जिले जहां लक्ष्य 95 प्रतिशत से अधिक हासिल हुआ

पटना, नालंदा, बक्सर, रोहतास, अरवल, नवादा, औरंगाबाद, सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, वैशाली, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर, बांका, सहरसा, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जैसे जिलों में लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत या उससे अधिक उपलब्धि दर्ज की गई है.

राज्य में मक्का की बढ़ती खेती इस बात की ओर इशारा दे रही है कि आने वाले वर्षों में बिहार देश के मक्का उत्पादन के नक्शे पर और अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दे सकता है.(पटना से अंकित कुमार का इनपुट)

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