UP News: 'गो संरक्षण मिशन' में महिलाओं और FPO को बड़ा मौका, योगी सरकार 2100 करोड़ रुपये करेगी खर्च

UP News: 'गो संरक्षण मिशन' में महिलाओं और FPO को बड़ा मौका, योगी सरकार 2100 करोड़ रुपये करेगी खर्च

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को नई दिशा देने की तैयारी है. योगी सरकार ने ‘गो संरक्षण मिशन’ को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए इसमें महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों की भागीदारी का रास्ता खोल दिया है. सरकार ने इसके लिए 2100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है.

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नवीन लाल सूरी
  • Lucknow ,
  • Mar 06, 2026,
  • Updated Mar 06, 2026, 8:43 PM IST

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को लेकर सरकार नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब इस अभियान को सीधे ग्रामीण समाज से जोड़ने की तैयारी की गई है. पहली बार ग्रामीण महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को गो संरक्षण मिशन में भागीदार बनाया जाएगा, जिससे गोशालाओं के संचालन के साथ ग्रामीणों के लिए आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. प्रदेश सरकार का लक्ष्‍य है कि गोसेवा और गो संरक्षण को केवल परंपरा तक सीमित रखने के बजाय इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए.

SHG और FPO चलाएंगे गो आश्रय स्थल

इसी दिशा में गो आश्रय स्थलों के संचालन में महिला स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. इससे गोवंश की देखभाल बेहतर तरीके से हो सकेगी और गांवों में आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे. उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदि‍त्‍यनाथ के निर्देश पर राज्य में गो संरक्षण को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है.

पहली बार गो संरक्षण पर खर्च होंगे 2100 करोड़ रुपये

योगी सरकार का लक्ष्य है कि इस मिशन को जनभागीदारी के माध्यम से मजबूत किया जाए, ताकि गो संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक अभियान का रूप ले सके. राज्‍य सरकार ने इस दिशा में बड़ा वित्तीय प्रावधान भी किया है. प्रदेश में पहली बार गो संरक्षण के लिए 2000 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है, जबकि वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये अलग से निर्धारित किए गए हैं. इस प्रकार कुल 2100 करोड़ रुपये गो संरक्षण मिशन पर खर्च किए जाएंगे.

वर्तमान में यूपी में 7500 गो आश्रय स्‍थल

प्रदेश में इस समय लगभग 7500 गो आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं, जहां 12,38,547 निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया गया है. इसके अलावा 155 वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण भी विभिन्न जिलों में जारी है. सरकार का लक्ष्य इन केंद्रों को भविष्य में आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित करना है.

पशुओं के भरण-पोषण के लिए मिलती है सब्सिडी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के तहत अब तक 1,13,631 पशुपालकों को 1,81,418 गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं. पशुपालकों को गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपये की सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भुगतान व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हुई है.

चयनित SHG को मिलेगी जिम्‍मेदारी

सरकार की योजना है कि आगे चलकर प्रत्येक जिले में चयनित महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर गोवंश की देखभाल, पोषण और गो उत्पादों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जाए. गोबर और गोमूत्र से बनने वाले उत्पाद, जैविक खाद और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयोगों के जरिए गो आश्रय केंद्रों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा. 

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