
मुर्राह सिर्फ पंजाब, हरियाणा और यूपी में ही नहीं पाली जा रही है. मुर्राह नस्ल की भैंस को अब देश के हर उस राज्य में पसंद किया जा रहा है जहां वो आसानी से पाली जा सकती है. कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना आदि राज्यों में भी मुर्राह को बहुत पसंद किया जा रहा है. डेयरी एकपर्ट का कहना है कि मुर्राह भैंस की डिमांड भारत में ही नहीं विदेशों में भी है. यही वजह है कि मुर्राह नस्ल को बुल्गारिया, फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड, चीन, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल, पूर्व यूएसएसआर, म्यांमार, वियतनाम, ब्राजील और श्रीलंका जैसे देशों में भी पाला जा रहा है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो मुर्राह भैंस की ज्यादातर खरीद पंजाब और हरियाणा से होती है.
पशुपालक किसी भी राज्य का हो, लेकिन मुर्राह भैंस खरीदने के लिए वो जाते पंजाब-हरियाणा ही हैं. लेकिन कई बार मुर्राह भैंस की खरीद-फरोख्त के दौरान धोखाधड़ी भी हो जाती है. प्योर नस्ल की मुर्राह की जगह कम दूध देने वाली मिक्स ब्रीड की भैंस बेच दी जाती है. लेकिन, अगर एक्सपर्ट के बताए कुछ टिप्स अपनाकर मुर्राह भैंस की खरीद की जाए तो फिर धोखाधड़ी की संभावनाएं न के बराबर ही रह जाती हैं.
मुर्राह भैंस का रंग गहरा काला होता है. चेहरे और पैर के ऊपरी हिस्सों पर शायद ही कभी सफेद निशान हो सकते हैं, लेकिन ये कोई जरूरी नहीं कि सफेद रंग हो.
सींग दूसरी भैंसों से अलग छोटा, कड़ा, पीछे और ऊपर की ओर मुड़ता हुआ और अंदर की ओर मुड़ता हुआ होता है. सींग कुछ हद तक चपटे होते हैं. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है सींग थोड़े ढीले हो जाते हैं लेकिन सर्पिल मोड़ बढ़ जाते हैं.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि मुर्राह भैंस को रबी में बरसीम, जई और सरसों का हरा चारा खिलाया जा सकता है. खरीफ में बाजरा, ज्वार और क्लस्टर बीन खिलाए जा सकते हैं. खली और दूसरे मिक्चार के साथ गेहूं और दाल का भूसा भी दिया जाता है.
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