Straw for Animal: खेतों में कटने को तैयार है गेहूं, पशुओं को ऐसे खि‍लाएं नई तूड़ी (भूसा)

Straw for Animal: खेतों में कटने को तैयार है गेहूं, पशुओं को ऐसे खि‍लाएं नई तूड़ी (भूसा)

Straw for Animal ये वो वक्त है जब पशुओं की खरीद-फरोख्त भी होती है. इसलिए इस बात का ख्याल रखना बड़ा जरूरी हो जाता है कि पशु बीमार न हो. बीमारी की रोकथाम के लिए पशुओं को नया भूसा न खि‍लाएं. नए पशु को खरीदकर लाने से पहले तीन टेस्ट जरूर करा लें. ये तीन टेस्ट कराने के बाद पशुओं को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है. 

animal feed Wheat Strawanimal feed Wheat Straw
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Mar 25, 2026,
  • Updated Mar 25, 2026, 11:21 AM IST

कई बार ऐसा भी होता है कि जिस वजह के बारे में हम सोचते भी नहीं है और उसके चलते भी पशु यानि गाय-भैंस बीमार हो जाते हैं. जैसे हम अगर भूसे की बात करें तो बहुत सारे ऐसे पशुपालक भी हैं जो ये नहीं जानते कि पशुओं को नया भूसा सीधे नहीं खि‍लाना चाहिए. नए भूसे को खिलाने का भी एक तरीका है. खासतौर पर मार्च महीने से ही एनिमल एक्सपर्ट बताने लगते हैं कि नया भूसा पशुओं को कैसे खिलाना चाहिए. क्योंकि अप्रैल में गेहूं कटने लगता है और बाजार में नया भूसा आ जाता है. कुछ जगहों पर मार्च में ही नया भूसा बाजार में आ जाता है. 

अगर ये नया भूसा सीधे पशुओं को खि‍लाया तो उनके बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है. और बीमारी लागत भी बढ़ा देती है. पशु बीमार होगा तो उसका उत्पादन भी प्रभावित होगा. यही वो वजह होती है जब पशुपालक को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. एक तो पशु की बीमारी पर खर्चा होता है और दूसरा बीमार होने पर पशु का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. पशु की ग्रोथ भी रुक जाती है. 

ये है नया भूसा खि‍लाने का तरीका 

  • नई तूड़ी सीधे तौर पर खिलाने से पशु का पेट खराब हो सकता है. 
  • फसल कटाई के दौरान शुरुआत में पशुओं को नई तूड़ी कम ही खिलाएं.
  • तूड़ी में लगी मिट्टी पशु न खाए, इसलिए तूड़ी छान और भिगो कर खि‍लाएं.
  • पशु का पेट खराब न हो इसके लिए नई और पुरानी तूड़ी मिलाकर खि‍लाएं.
  • पशुओं को दी जा रही तूड़ी में सेंधा नमक, हींग, हरड़, मोटी सौफ मिला लें. 
  • पशुओं की खुराक में 30 फीसद तूड़ी और 70 फीसद हरा चारा मिला लें. 
  • पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए खुली जगह के बजाय शेड में बांधे.
  • गर्मियों में पशुओं को ऐसी जगह रखें जहां उन्हें सीधी हवा और लू न लगे.
  • गर्मियों में दूध उत्पादन कम न हो इसके लिए 24 घंटे साफ पानी पिलाते रहें. 
  • गर्मियों में हरे चारे की कमी हो तो अजोला से इसकी भरपाई की जा सकती है. 
  • छायादार जगह में 2.5 ×1.5 x 0.2 मीटर गहरा गड्डा बनाकर और एक पॉलीथीन शीट बिछा दें. 
  • अजोला के लिए तैयार किए गए गड्डे में 10 सेमी (आधा) पानी का स्तर बना रहे.
  • अजोला के गड्डे में 15 किलो छानी हुई मिट्टी को पांच किलो गोबर के साथ फैला दें. 
  • पानी में मिट्टी-गोबर के साथ-साथ 500 ग्राम अजोला कल्चर भी डाल दें.
  • अजोला का सात दिनों में 10 किलो तक उत्पादन हो सकता है.
  • सात दिन बाद हर रोज 1.5 किलो तक अजोला निकाल सकते है. 
  • पशुओं को खि‍लाने से पहले अजोला को जरुर धो लें.

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