Cow Lumpy: आज से ही शुरू किया गाय-भैंस का खरहेरा तो पशुपालकों को होगा दोहरा फायदा

Cow Lumpy: आज से ही शुरू किया गाय-भैंस का खरहेरा तो पशुपालकों को होगा दोहरा फायदा

Cow Lumpy स्किन की मामूली बीमारी भी गाय-भैंस और दूसरे पशुओं को परेशान करती है, इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट हर रोज पशु का खरहेरा (ब्रश से मालिश) करने की सलाह देते हैं. क्योंकि खुजली होने पर पशु ना सिर्फ शारीरिक रूप से परेशान होता है, बल्कि मानसिक तौर पर उसका तनाव बढ़ जाता है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Sep 15, 2026,
  • Updated Sep 15, 2026, 4:22 PM IST

गाय-भैंस की दो बड़ी बीमारियों को लेकर अलर्ट जारी हो चुका है. कई राज्यों में गायों की लंपी का असर देखने को मिल रहा है. गाय-भैंस की बड़ी बीमारी खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) का खतरा भी लगातार बना हुआ है. वहीं अब मौसम में बदलाव आएगा. ठंड बढ़ने से पशुओं की स्किडन खुश्क होगी. वहीं लंपी बीमारी मच्छर-मक्खी द्वारा गाय के ऊपर बैठने से होती है. ऐसे में जरूरी है कि गाय-भैंस का खरहेरा (ब्रश से मालिश) किया जाए. मौसम के चलते अगर स्कि.न खुश्क हो रही होगी तो खुजली होने की संभावना नहीं रहेगी. 

वहीं गायों को खरहेरा करने से उनका शरीर भी साफ रहेगा और मच्छर-मक्खी जल्दी नहीं बैठेंगे. जिससे गाय लंपी के वायरस से भी बची रहेंगी. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो खुजली के चलते पशु दिमागी और शारीरिक तौर पर परेशान हो जाते हैं. यही तनाव उनके उत्पादन पर भी असर डालता है. एक्सपर्ट का कहना है कि कभी भी खुजली को मामूली बीमारी नहीं समझना चाहिए. इसके चलते ही कई बार पशुओं में गंभीर घाव तक हो जाते हैं. 

दीवार, तार-पेड़ से ना रगड़ने दें 

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि गाय-भैंस, भेड़-बकरी, घोड़ा, ऊंट और याक समेत और भी दूसरे पालतू पशुओं को खासकर बरसात के दिनों में खुजली की बीमारी हो जाती है. हमारे यहां पशु की बात तो छोडि़ए इंसानों में भी इसे बेहद मामूली समझा जाता है. यही वजह है कि जब तक खुजली पशु में घाव या किसी बड़े इंफेक्शन का रूप नहीं ले लेती है तब तक पशुपालक उस पर गौर नहीं करते हैं. हालांकि शरीर के कुछ हिस्सों की खुजली को तो सभी छोटे-बड़े पशु खुद से ही दूर करने की कोशिश करते हैं.

लेकिन शरीर के कुछ ऐसे हिस्से में खुजली होने लगती है जहां जानवर अपने पैर या पूंछ का इस्तेमाल नहीं कर पाता है. अब अगर ऐसे में वो पशु शेड में खूंटे से बंधा है तो उसके लिए ये और भी मुश्किल वाला वक्त होता है. इस दौरान पशु अपने आसपास ऐसी चीज तलाश करता है जिससे वो अपनी खुजली दूर कर सके. और अगर पशु खुला हुआ है तो फिर वो कभी पेड़ से, कभी दीवार से तो कभी लोहे के तार की बाड़ से अपनी शरीर को रगड़कर खुजली दूर करने की कोशिश करता है.

ऐसा करने के चलते ही पशु कई बार लोहे के तार या कांटों वाले झाड़ से खुजाकर अपने को घायल कर लेता है. लोहे के तार से पशु के शरीर पर जख्म हो जाता है. जंग लगे लोहे से घाव होने पर पशु के शरीर में टिटनेस का इंफेक्शन फैल जाता है. 

खाने-पीने पर असर डालती है खुजली 

पशु छोटा हो या बड़ा जब उसे खुजली होती है तो उसका असर उसके दिमाग पर भी होता है. पशु परेशान रहने लगता है. वो ठीक से अपनी खुराक भी नहीं खा पाता है. पशु पूरी तरह से तनाव में आ जाता है. और इन्हीं सब परेशानियों के चलते ही पशु का दूध उत्पादन कम हो जाता है. 

खरहेरा के साथ करें ब्रश का इस्तेमाल 

पशु को खुजली हो या ना हो, लेकिन दिन में एक बार पशु का खरहेरा जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से पशु को बड़ा आराम मिलता है. पशु का तनाव भी दूर होता है. एक ब्रश की मदद से खरहेरा किया जा सकता है. अब तो बाजार में इस तरह के ब्रश भी आ रहे है जिनकी मदद से पशु खुद ही अपने शरीर की मालिश कर लेते हैं. बाजार में ब्रश की कीमत 40 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक है. बाजार में मैक्सी, मिडी, मिनी और टोटम चार तरह के ब्रश मौजूद हैं. 

ये भी पढ़ें-

Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात 

Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम

MORE NEWS

Read more!