
ढाई दशक से ज्यादा का वक्त बीतने के बाद भी भारत दूध उत्पादन में नंबर वन बना हुआ है. देश में रोजाना करीब 70 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है. ये आंकड़ा और बड़ा भी हो सकता है, क्योंकि देश में जितनी दुधारू पशुओं की संख्या है उससे कम पशु ही दूध देते हैं. प्रति पशु दूध उत्पादन बहुत कम है. यही वजह है कि दूध उत्पादन की लागत देश में ज्यादा है. इसीलिए हम डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट के मामले में बहुत पीछे हैं. ऐसा नहीं है कि हमारे यहां डेयरी सेक्टर में हाईटेक डेयरी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. डेयरी टेक्नोलॉजी के बाद देश में प्रति पशु दूध उत्पादन बहुत कम है.
विश्व के कई छोटे-बड़े देश प्रति पशु दूध उत्पादन में हमसे बहुत ज्यादा आगे हैं. साथ ही डेयरी एक्सपोर्ट का आंकड़ा भी उनका ज्यादा है. हालांकि इससे निपटना कोई मुश्किल काम नहीं है. डेयरी और एनिमल एक्सपर्ट के बताए 20 टिप्स अपनाकर हम दोनों ही क्षेत्रों में सुधार ला सकते हैं. यही वजह है कि एक्सपर्ट मिल्क रेव्युलेशन-2 पर जोर दे रहे हैं.
अमूल के पूर्व एमडी और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि मिल्क रेव्युलेशन-2 से जुड़े डेयरी एक्सपर्ट के कुछ टिप्स अपनाकर पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ाया जा सकता है.
खासतौर पर खाने की चीजों पर अच्छी या खराब पैकेजिंग का असर पड़ता है.
दूध को छोड़कर बाकी सारे डेयरी प्रोडक्ट प्रोसेस होते हैं.
आइसक्रीम में भी पैकिंग का बड़ा रोल है.
पैकिंग के चलते ही डेयरी प्रोडक्ट के रेट बाजार पर भी असर डालते हैं.
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