
मौसम पूरी तरह से बदल रहा है. बदलता मौसम इंसान ही नहीं जीव-जन्तुओं के लिए भी नुकसानदायक होता है. उस पर बीच-बीच में हल्की बारिश भी हो रही है. इसके चलते भी खासतौर से मछलियों के तालाब के पानी की सेहत बिगड़ने लगती है. अप्रैल चल रहा है तो खासतौर पर दोपहर के वक्त तालाब के पानी में बहुत सारे बदलाव होते हैं. क्योंकि दिन के वक्त तापमान भी धीरे-धीरे ऊपर की ओर खिसक रहा है. मछली पालकों को ऐसे में अलर्ट रहने की जरूरत है. क्योंकि अप्रैल के आखिर और मई-जून के दौरान तालाब का पानी चाय उबालने जैसा हो जाता है. फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो मछलियों के तालाब के पानी का तापमान 30-31 डिग्री से ऊपर हो गया है तो ये मछलियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.
एक्सपर्ट भी गर्मियों में मछलियों के तालाब को लेकर एहतियात बरतने की सलाह देते हैं. मछलियों की खुराक, तालाब के पानी का तापमान, पानी का लेवल और तालाब की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देने की टिप्स दी जाती हैं. साथ ही रोजाना की देखभाल कैसी हो इसके बारे में भी जानकारी दी जाती है.
फिशरीज एक्सपर्ट महीपाल सिंह का कहना है कि उत्तर भारत के तालाबों में ज्यादातर रोहू, कतला, मृंगाल मछली का पालन किया जाता है. गर्मी के इस मौसम में मछलियों को 26 से 31 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन अभी तापमान बढ़ रहा है. आने वाले 15-20 दिन बाद तापमान 40 से 42 डिग्री तक तापमान पहुंच जाएगा. यह मछलियों के लिए बहुत ही खतरनाक होता है.
जब गर्म हवाएं चलती हैं तो हालात और भी खराब हो जाते हैं. होता ये है कि तालाब में फाइटो क्लाइंजम (अल्गी) लगी होती है. पानी के अंदर इसी से झींगा को मुख्य रूप से ऑक्सीजन मिलती है. लेकिन तेज गर्मी और गर्म पानी के चलते यह मुरझा जाती है. अब क्योंकि मछली पालन के लिए बिजली कमर्शियल होने के चलते बहुत महंगी है तो मछली पालक तालाब में पंखे और इरेटर बहुत कम चलाते हैं.
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