
मीट एक्सपोर्ट से जुड़ी एक अच्छी खबर आई है. कोरोना के दौरान और उसके बाद जहां दूसरे सेक्टर घाटे में जा रहे थे या बंद हो रहे थे तो उस वक्त देश-दुनिया में मीट की डिमांड बढ़ रही थी. खासतौर पर बफैलो और भेड़-बकरे के मीट की ज्यादा डिमांड आ रही थी. यही वजह है कि कोरोना से लेकर आज तक भेड़-बकरे के मीट की डिमांड डबल से भी ज्यादा हो गई है. यहां तक की मीट के साथ ही जिन्दा (लाइव) भेड़-बकरे भी भारत से एक्सपोर्ट हो रहे हैं.
बफैलो मीट की बात करें तो बीते 10 साल में सबसे उच्चतम आंकड़े पर है. कोरोना के बाद से बफैलो मीट एक्सपोर्ट में 11 हजार करोड़ रुपये का उछाल आया है. विश्व के सिर्फ 5 देश ऐसे हैं जो भारत से सबसे ज्यादा 60 फीसद से भी ऊपर बफैलो मीट इंपोर्ट करते हैं. मीट एक्सपोर्ट के ये आंकड़े डीजीसीआई ने संसद में रखे हैं. गौरतलब रहे विश्व के ज्यादातर देशों में भारतीय बफैलो मीट बहुत पसंद किया जाता है.
डीजीसीआई के आंकड़े बताते हैं कि साल 2020-21 में भारत से 330 करोड़ रुपये का भेड़ और बकरे का मीट एक्सपोर्ट हुआ था. इसकी मात्रा 7050 टन थी. वहीं अगर 2024-25 की बात करें तो इस साल 719 करोड़ रुपये का 11581 टन मीट भारत से एक्सपोर्ट हुआ था. रुपयों में बात करें तो आंकड़ा डबल हो चुका है. लेकिन भेड़-बकरे के मामले में एक अच्छी बात ये भी है कि मीट के साथ-साथ लाइव भी एक्सपोर्ट हो रहे हैं. साल 2024-25 में ही 156 करोड़ रुपये के भेड़-बकरे एक्सपोर्ट किए गए थे. जबकि उससे एक साल पहले 2023-24 में 92 करोड़ रुपये के भेड़-बकरे दूसरे देशों को बेचे गए थे.
बफैलो मीट का एक्सपोर्ट टॉप पर है. विश्व के ज्यादातर देशों में बफैलो मीट की ही डिमांड है. यही वजह है कि प्रोटीन के लिए हो या फिर किसी और के लिए, बफैलो मीट की डिमांड बढ़ रही है. अगर साल 2020-21 की बात करें तो इस दौरान 23460 करोड़ रुपये का बफैलो मीट एक्सपोर्ट हुआ था. जिसकी मात्रा 11 लाख टन थी. एक्सपोर्ट का ये आंकड़ा बढ़ते-बढ़ते साल 2024-25 में बफैलो मीट एक्सपोर्ट 34392 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच चुका है, इसकी मात्रा 12.55 लाख टन थी.
केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में 1.45 करोड़ तो साल 2025 में 1.51 करोड़ भैंसे मीट के लिए काटी गईं थी. अब ट्रेसेबिलिटी में होगा ये कि भैंस की उम्र, मीट के लिए मेल को काटा गया है या फीमेल को. नस्ल कौनसी थी. किस शहर के कौनसे रजिस्टर्ड फार्म पर उसे पाला गया था. क्या भैंस को सभी जरूरी टीके लगवाए गए थे. कब और कौनसी बड़ी बीमारियां काटे गए पशुओं को हुईं. उन्हें क्या दवाई दी गईं. फीमेल है तो कितने बच्चे दे चुकी है. जहां भैंस को पाला गया है वहां कोई संक्रमण तो नहीं फैला.
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