
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के गांव टांडा सिक्कावाला में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया. दरअसल, किसान सुक्खन सिंह की निजी पशुशाला में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया. इस अग्निकांड में एक दुधारू भैंस जिंदा जल गई, जबकि अन्य पशु भी झुलस गए. हादसे में पशुशाला समेत करीब डेढ़ लाख रुपये का सामान राख हो गया.
मिली जानकारी के अनुसार, शाम करीब 4 बजकर 20 मिनट पर पशुशाला में अचानक एक छोटी सी चिंगारी से आग भड़क उठी. देखते ही देखते आग ने पूरे शेड को अपनी चपेट में ले लिया. उस समय पशुशाला में कुल सात पशु बंधे हुए थे, जिनमें कटिया, बैल, बकरी और एक दुधारू भैंस शामिल थीं. आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पशु खुद को बचाने के लिए इधर-उधर छटपटाते रहे, लेकिन बंधे होने के कारण बाहर नहीं निकल सके.
ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और तहसील प्रशासन को सूचना देने के लिए लगातार कॉल किए, लेकिन आरोप है कि न तो फायर ब्रिगेड की कॉल रिसीव हुई और न ही प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा. एसडीएम से संपर्क करने की कोशिश भी नाकाम रही.
इधर गांव के लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए खुद ही मोर्चा संभाला. ग्रामीणों ने नलों और हैंडपंप से पानी भर-भरकर आग बुझाने की कोशिश की. बाल्टियों और पाइप के सहारे काफी देर तक प्रयास किए गए, लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उस पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका. दुधारू भैंस आग की चपेट में आकर मौके पर ही जल गई, जिसे बचाने के लिए ग्रामीणों ने भरसक प्रयास किए.
पीड़ित परिवार के मुताबिक पशुशाला में रखा चारा, लकड़ी, पशु उपकरण और अन्य घरेलू सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया. वहीं, घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीणों में भी प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर फायर ब्रिगेड पहुंच जाती तो भैंस की जान बचाई जा सकती थी और नुकसान भी कम होता. फिलहाल आग लगने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है, हालांकि प्राथमिक आशंका शॉर्ट सर्किट या सूखे चारे में लगी चिंगारी की जताई जा रही है. यह घटना न केवल एक परिवार के लिए आर्थिक आघात है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की तत्परता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. गांव में अब लोग प्रशासन से त्वरित सहायता और मुआवजे की मांग कर रहे हैं.