बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं जो खासतौर पर गर्मियों के मौसम में पशुओं को परेशानी करती हैं. वहीं पशुपालन की एक हकीकत ये भी है कि पशुओं की बहुत सारी बीमारियों के इलाज के नाम पर रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन (टीका) है. यही वजह है कि एनिमल एक्सपर्ट गर्मियां शुरू होते ही पशुओं को टीके लगवाने की सलाह देते हैं. लेकिन टीके लगवाते वक्त कुछ खास बातों का ख्याल रखने की सलाह भी दी जाती है. आज ज्यादातर देश एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) फ्री एनिमल प्रोडक्ट की डिमांड कर रहे हैं. एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक इसका एक मात्र इलाज ये है कि पशुओं को एंटी बायोटिक दवाई खाने को न दी जाए.
लेकिन ये तभी मुमकिन है जब पशु बीमार न हों. इसीलिए सरकार पशुओं के टीकाकरण पर जोर दे रही है. इससे होता ये है कि टीका लगने से पशु बीमारी की चपेट में नहीं आता है. दूध के मामले में हम पहले से ही नंबर वन है. वहीं अंडा उत्पादन में हम तीसरे से दूसरे नंबर पर आ गए हैं. मीट में भी आठवें से एकदम पांचवें नंबर की छलांग लगाई है.
ये हैं टीकाकरण कराने के फायदे
- पशुओं में होने वाली बीमारियों से बचाव.
- पशुओं में होने वाली महामारी से बचाव.
- पशुओं से मनुष्यों में होने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव.
- बीमारियो के इलाज से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव.
- एनिमल प्रोडक्ट से इंसानों में होने वाली बीमारी से बचाव.
- किसानों की पशुपालन में कम लागत से मुनाफा बढ़ता है.
टीकाकरण के वक्त बरतनी चाहिए ये सावधानियां
- प्रथम टीकाकरण केवल स्वस्थ पशुओं में ही करना चाहिए.
- टीकाकरण से कम से कम दो सप्ताह पहले कृमिनाशक दवाई देनी चाहिये.
- टीकाकरण के समय पशुओं का हेल्दी होना जरूरी है.
- बीमार और कमजोर पशुओं का टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- बीमारी फैलने से करीब 20-30 दिन पहले टीकाकरण करा लेना चाहिए.
- रोग फैलने के संभावित समय से करीब 20-30 दिन पहले करना चाहिए.
- मानकों के अनुसार कोल्ड बॉक्स में रखे टीके ही पशुओं को लगाने चाहिए.
- जहां पशु ज्यादा हों वहां झुण्ड में पशुओं का टीकाकरण करना जरूरी होता है.
- गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण नहीं करना चाहिए.
- टीकाकरण का रिकार्ड रखने के लिये हमेशा पशु स्वास्थ्य कार्ड बनाएं.
- टीकाकरण के दौरान हर पशु के लिये अलग-अलग सूईयों का इस्तेमाल करें.
- टीके में इस्तेमाल की गई सूई और सिरिज को नियमानुसार डिस्पोज करें.
Meat Production: पश्चिम बंगाल नहीं, UP को दिया गया मीट उत्पादन में नंबर वन बनने का टॉरगेट
PDFA: ये हैं 80 और 30 लीटर दूध देकर ट्रैक्टर जीतने वालीं गाय-भैंस, गांव में हो रहा स्वागत