
अभी बीते महीने ही डेयरियों ने दूध के दाम बढ़ाए हैं. प्रति लीटर दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है. लेकिन एक बार फिर दूध पर आफत आ सकती है. सीधे शब्दों में बोलें तो दूध के दाम बढ़ सकते हैं. इस बात का इशारा डेयरी से जुड़े लोग भी दे रहे हैं. अभी जो दाम बढ़े हैं उन्हें हर साल की तरह होने वाली बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है. लेकिन अब अगर दूध के दाम बढ़े तो उसके पीछे ईरान-अमेरिका विवाद होगा. क्योंकि बीते कई दिनों से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं.
और ये हम अच्छी तरह से जानते हैं कि मिल्क सप्लाई चैन में पेट्रोल-डीजल का कितना इस्तेमाल होता है. दाम बढ़ने को लेकर कुछ ऐसा ही इशारा नेशनल डेयरी डवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के चेयरमैन ने किसान तक से हुई बातचीत में दिया है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो पशुपालक के पास से लेकर डेयरी प्लांट तक दूध आने में हर जगह वाहनों का इस्तेमाल होता है.
एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने किसान तक से बातचीत में बताया कि पेट्रोल-डीजल के जो दाम बढ़ रहे हैं उसका असर डेयरियों पर भी पड़ रहा है. मिल्क सप्लाई चेन में ट्रांसपोर्ट का बड़ा और अहम रोल है. पशुपालक के घर से शुरू होने वाला सिलसिला डेयरी प्लांट तक ट्रांसपोर्ट पर ही टिका होता है. पेट्रोल-डीजल के दाम पर हुई बढ़ोतरी का असर दूध और दूध से बनने वाले प्रोडक्ट पर दिखना शुरू हो गया है. लागत बढ़ गई है. लेकिन अभी बढ़ी हुई लागत का बोझ कंपनियां ही उठा रही हैं. लेकिन बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाने की कंपनियों की भी अपनी एक क्षमता है.
डेयरी एक्सपर्ट ने बताया कि कोई भी पशुपालक अपने घर पर गाय-भैंस का दूध निकालकर उसे एक जगह जमा कर लेता है. फिर उस टोटल दूध को मिल्क कलेक्शन सेंटर पर लेकर जाता है. इसके लिए पशुपालक ज्यादातर दोपहिया वाहन का इस्तेमाल करता है जो पेट्रोल से चलता है.
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