Gir Cow: बरेली में देसी गायों की नस्ल पर होगी रिसर्च, ब्राजील और लीड जैनेटिक्स आए साथ

Gir Cow: बरेली में देसी गायों की नस्ल पर होगी रिसर्च, ब्राजील और लीड जैनेटिक्स आए साथ

Gir Cow बीएल एग्रो ने मार्च 2025 में गायों की नस्ल और डेयरी में एक हजार करोड़ रुपये इंवेस्ट करने की बात कही थी. मकसद था इकोनोमी को बढ़ाना और 5 हजार किसानों को इसका फायदा पहुंचाना. लीड जेनेटिक्स इसकी शुरुआत 5000 देसी गायों से करेगी और लक्ष्य 10 हजार गायों का है.

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Feb 25, 2026,
  • Updated Feb 25, 2026, 12:32 PM IST

बरेली, यूपी देसी गायों की नस्ल सुधार का एक बड़ा केन्द्र बन सकता है. खासतौर पर गिर गाय की फैक्ट्री खुल सकती है. जिस तरह से भारतीय कंपनी लीड जेनेटिक्स ब्राजील के साथ मिलकर यहां गिर गाय पर काम करेगी तो उससे गिर गाय की संख्या बढ़ेगी. इसके साथ ही यहां इन विट्रो फर्टिलाइजेशन–एम्ब्रियो ट्रांसफर (आईवीएफ–ईटी) लैब, हाईटेक पैथोलॉजी टेस्ट लैब और जीनोमिक एनालिसिस की सुविधाएं भी होंगी. इसके लिए लीड जेनेटिक्स ने इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेंटर तैयार किया गया है. 

ब्राजील के साथ हुए एक एमओयू के बाद इस सेंटर की शुरुआत की गई है. इससे पहले लीड जेने‍टिक्स यहां पर 25 एकड़ एरिया में बीएल कामधेनु परिसर बना चुका है. कंपनी के मुताबिक यहां ब्राजील से गिर गाय के एम्ब्रियो लाए जाएंगे. उन्हें गायों में ट्रांसफर किया जाएगा. जिससे गिर गाय की ज्यादा से ज्यादा संख्या को बढ़ाया जा सके.  

ऐसे काम करेगा इंटीग्रेटेड ऑफ एक्सीलेंस सेंटर 

घनश्याम खंडेलवाल, अध्यक्ष, बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज ने बताया कि 25 एकड़ एरिया में फैले इस सेंटर को देशी नस्ल की गायों को संरक्षि‍त करने के लिए तैयार किया गया है. सेंटर में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन–एम्ब्रियो ट्रांसफर (आईवीएफ–ईटी) लैब, हाईटेक पैथोलॉजी टेस्ट लैब और जीनोमिक एनालिसिस की सुविधाएं होंगी. पैथोलॉजी लैब की मदद से पशुओं में रोगों की जल्दी और सटीक पहचान हो सकेगी.

जिससे बायो सिक्योरिटी मजबूत होगी और पशुधन की उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी. जीनोमिक लैब नस्ल सुधार, श्रेष्ठ पशुओं की पहचान और वैज्ञानिक, डेटा-आधारित रीप्रोडक्शन सिस्टम को बढ़ावा देगी. वहीं आईवीएफ–ईटी तकनीक की मदद से हाई क्वालिटी वाली देशी नस्लों को बढ़ावा मिलेगा. 

मंत्री बोले, किसानों की इनकम बढ़ाएगा सेंटर 

इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेंटर का उद्घाटन करते हुए अरुण कुमार सक्सेना, मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, उत्तर प्रदेश ने कहा कि यह सेंटर पीएम नरेंद्र मोदी के ‘तीन सौ साठ डिग्री’ वाले विजन से प्रेरित है. उन्होंने कहा कि इस मॉडल में पशुधन, जैव विविधता, जैविक कृषि, ऊर्जा उत्पादन और अपशिष्ट प्रबंधन को इंटीग्रेटेड कर ग्रामीण विकास की अवधारणा को साकार किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा डेयरी उत्पादक राज्य है और वैज्ञानिक रीप्रोडक्शन पद्धतियों और उन्नत जीनोमिक अनुसंधान की मदद से राज्य उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए मीथेन उत्सर्जन में कमी लाने में मददगार साबित होगा. साथ ही ये किसानों की इनकम बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा. 

इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेंटर का उद्घाटन करते यूपी के वन मंत्री अरुण कुमार सक्सेना.

जेबू ब्रीडस एसोसिएशन भी रही शामिल 

सेंटर की शुरुआत के मौके पर ब्राजील से भी एक डेलीगेशन आया था. इस डेलीगेशन में ब्राजीलियन एसोसिएशन ऑफ जेबू ब्रीडस के प्रेसिडेंट भी थे. डेलीगेशन ने लैब, रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर और पशुधन प्रबंधन सिस्टम का निरीक्षण किया और भारत–ब्राजील के बीच वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं पर सकारात्मक चर्चा की. इस पहल को दोनों देशों के बीच एनिमल जेनेटिक्स और डेयरी डवलपमेंट के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है.

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