Goat-Sheep Vaccine: सिर्फ एक टीके से कंट्रोल हो रही भेड़-बकरियों की PPR-Sheep Pox बीमारी

Goat-Sheep Vaccine: सिर्फ एक टीके से कंट्रोल हो रही भेड़-बकरियों की PPR-Sheep Pox बीमारी

Goat-Sheep Vaccine भेड़-बकरियों को पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) और शीप पॉक्स बहुत परेशानी करती है. इसके चलते अभी तक दो-दो वैक्सीन लगवानी पड़ती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब ये दोनों बीमारी होने पर पशुओं को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली की बनी सिर्फ एक ही तरह की वैक्सीन लगवानी होती है. 

नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 13, 2026,
  • Updated Jul 13, 2026, 2:22 PM IST

भेड़-बकरियों को सबसे ज्यादा खतरा किसी बीमारी से रहता है तो वो है पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) और शीप पॉक्स. ये दोनों बीमारियां भेड़-बकरियों की जानलेवा बीमारी है. यहां पीपीआर और शीप पॉक्स बीमारी की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि ये ज्यादातर बरसात के दिनों में ही होती है. और अगर एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अभी तक इन बीमारियों का कोई इलाज नहीं है. सिर्फ वैक्सीन (टीके) लगातार ही इसकी रोकथाम की जाती है. जबकि टीके पर पैसा खर्च होने के साथ ही इससे पशु का तनाव भी बढ़ता है. 

बरसात के दिनों में भेड़-बकरियों को लगने वाली वैक्सीन (टीके) के तनाव को नहीं झेलना होता है. क्योंकि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली ने पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स और शीप पॉक्स के लिए एक ही वैक्सीन बनाई है. जबकि पहले दो-दो वैक्सीन लगवानी पड़ती थी. ये दोनों बीमारियों की रोकथाम करती है. 

जानें PPR-शीप पॉक्स बीमारी के बारे में 

  • पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स बीमारी भेड़ और बकरियों दोनों को होती है. 
  • शीप पॉक्स बीमारी बकरियों को गोट पॉक्स नाम से होती है. 
  • IVRI डॉयरेक्टर का कहना है कि पीपीआर, शीप पॉक्स विषाणु जनित खतरनाक बीमारी हैं. 
  • पीपीआर और शीप पॉक्स चलते छोटे जुगाली करने वाले पशुओं की मौत हो जाती है. 
  • भेड़-बकरियों को पीपीआर और शीप-गोट पॉक्स का टीका नहीं लगवाने से मौत भी हो जाती है. 
  • एक हफ्ते तक अगर टीका नहीं लगवाया जाता है तो भेड़ों की मौत तक हो जाती है. 

ऐसे फैलती है पीपीआर बीमारी 

  • पीपीआर को बकरी का प्लेग के नाम से भी जाना जाता है. 
  • किसी एक को होने पर ये तेजी से दूसरे बकरे-बकरी को भी अपनी चपेट में ले लेती है. 
  • यह वायरस सांस की लार, नाक से निकलने वाला स्राव और दूषित उपकरणों के जरिए फैलता है. 
  • बीमारी की चपेट में आते ही भेड़-बकरी सुस्त और कमजोर हो जाते हैं. 
  • पीडि़त पशु  खाने से मुंह फेरने लगता है, आंखे लाल, आंख, मुंह और नाक से पानी बहता है. 
  • बुखार कम होते ही मुंह के अन्दर मसूड़ों और जीभ पर लाल-लाल दाने फूटकर घाव बनने लगते हैं. 
  • वक्त के साथ घाव सड़ने लगते हैं, आंखों में कीचड़ पड़ने लगता है. 
  • तेज बदबूदार खून और आंव के साथ दस्त लग जाते हैं. 
  • कई बार तो बकरी और भेड़ का गर्भ तक गिर जाता है. 
  • वक्त से टीकाकरण नहीं कराना जानलेवा हो जाता है. 
  • लगातार दस्त होने और घावों में सड़न बढ़ने से पशु की मौत हो जाती है. 

पीपीआर से ऐसे बचेंगी भेड़-बकरी 

  • पीपीआर से भेड़-बकरियों को बचाने के लिए टीकाकरण कराना जरूरी है. 
  • आईवीआरआई की रिसर्च से एक टीके से ही पीपीआर-शीप पॉक्स की रोकथाम हो जाएगी. 
  • जैसे ही भेड़-बकरी में पीपीआर के लक्षण दिखाई दें तो उसे शेड से अलग कर दें. 
  • पीडि़त भेड़-बकरी को हेल्दी पशुओं के साथ कभी ना रखें. पीडि़‍त पशु को पानी खूब पिलाएं. 

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