
बरसात के दिनों में अक्सर ग्राहकों की ये शिकायत रहती है कि उनके यहां दूध पतला आ रहा है. कई लोग तो सीधे शिकायत करते हैं कि दूध वाला ही ज्यादा पानी मिला रहा है. जबकि दूध वाला कहता है कि गाय-भैंस ही पतला दूध दे रही है तो हम क्या करें. हालांकि सच्चाई भी यही है, बरसात के दिनों में गाय-भैंस दूध पतला ही देती हैं. लेकिन इसके पीछे गलती कह लें या लापरवाही वो पशुपालक की ही होती है. ये हम नहीं एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं. और उनके ऐसा कहने के पीछे साइंटीफिक तर्क भी है.
एक्सपर्ट का तो यहां तक कहना है कि पशुपालकों की इस लापरवाही के चलते न सिर्फ दूध पतला होता है, बल्कि पशुओं का पेट भी खराब हो जाता है. पेट की परेशानी के चलते दूध उत्पादन भी कम हो जाता है. और ये सब होता है बरसात के दिनों में बदली गई पशु की खुराक के चलते. जिसे पशुपालक बहुत मामूली सी बात समझकर छोड़ देता है.
फोडर एक्सपर्ट डॉ. वाईके सिंह का कहना है कि ज्यादातर हरे चारे में भरपूर मात्रा में पानी होता है. अगर एक किलो हरे चारे क बात करें तो तीन से चार लीटर तक पानी पाया जाता है. बरसात में तो वैसे भी हरा चारा पानी में भीगा रहता है. इस मौसम में हर चारा भी बहुत होता है. और पशुपालक यही गलती करते हैं कि वो पशुओं को ज्यादा से ज्यादा हरा चारा खिलाने लगते हैं. बस इसी गलती की वजह से दूध पतला हो जाता है. पशु पानी तो पीता ही है, साथ में हरे चारे की वजह से भी शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि दूध देने वाली गाय और भैंस के लिए पानी की खूब जरूरत होती है. क्योंकि पानी की कमी का असर दूध उत्पादन पर भी पड़ता है. गाय अगर दूध दे रही है तो दिनभर में उसे कम से कम 30 से 50 लीटर पानी पीने के लिए चाहिए. वहीं अगर भैंस दूध दे रही है तो उसे दिनभर में 40 से 70 लीटर पानी की जरूरत होती है. गर्मियों में जमीन से निकला सामान्य पानी पिलाना चाहिए. नल की सप्लाई वाला पानी है तो वो गर्म नहीं होना चाहिए. करना तो ये चाहिए साफ हौज या बर्तन में सामान्य तापमान वाला पानी पशु के सामने ही रख देना चाहिए, जिससे जब भी उसे प्यास लगे तो वो जरूरत के हिसाब से पी ले.
चारा और भोजन पाचने में मददगार होता है.
शरीर के अलग-अलग जरूरतमंद हिस्सों की पूर्ति हो जाती है.
मूत्र के माध्यम से अवांछनीय और विषैले तत्व शरीर से बाहर निकल जाते हैं.
गर्मियों के दौरान पानी शरीर का तापमान बनाए रखने में मदद करता है.
दूध में करीब 85 फीसद पानी होता है, इसलिए एक लीटर दूध पर ढाई लीटर पानी चाहिए.
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