जैसे ही गर्मियों के मौसम में गर्म हवाएं चलने लगती हैं. तापमान भी 40 डिग्री को पार करने लगता है तो ऐसे में मछली पालन करना मुश्किल हो जाता है. जैसे ही तापमान बढ़ता है तो तालाब का पानी गर्म होने लगता है. ऑक्सीजन की कमी भी होने लगती है. गर्म पानी होने से मछलियों को कई और तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अब ऐसे में एक और बड़ी परेशानी ये है कि इस सब के बाद भी मछलियों के तालाब पर सीधी धूप पड़ना भी जरूरी होता है. लेकिन फिशरीज एक्सपर्ट की मानें तो इन परेशानियों से बचने के लिए कुछ जरूरी उपाए करने होते हैं.
अगर इनका पालन किया जाता है तो मछलियां बीमारी से भी बचती हैं और ग्रोथ भी अच्छी होत है. एक्सपर्ट की मानें तो नदी-समुद्र में तो मछलियां खुद से पल जाती हैं, लेकिन इनलैंड फिशरीज में तीन तरीके से मछलियां पाली जाती हैं. एक जाल लगाकर, दूसरा घर-खेत में टैंक बनाकर और तालाब खोदकर.सबसे बेहतर तालाब में मछली पालन माना गया है. लेकिन इनलैंड फिशरीज में देखभाल की बहुत जरूरत होती है.
फिशरीज एक्सपर्ट एमडी खान का कहना है कि मछली पालन के लिए तैयार किए गए टैंक या तालाब खुले में ऐसी जगह होने चाहिए जहां सूरज की सीधी धूप पड़ती हो. पानी में सीप और घोंघे आदि जीव-जन्तु न पनपने पाएं. मछलियों को मांसाहारी जीव-जन्तु से बचाने के लिए जाल का इस्तेमाल करना चाहिए. एक्सपर्ट की सलाह पर पानी में दवा का छिड़काव करते रहें.
एमडी खान ने बताया कि गर्मी और सर्दी में तालाब और टैंक के पानी का खासतौर पर ख्याल रखा जाता है. अगर सर्दी है तो तालाब और टैंक के पानी को ज्यादा ठंडा न होने दें. सुबह-शाम मोटर चलाकर ताजा पानी को मिलाकर तालाब के पानी को सामान्यै कर दें. इसी तरह से गर्मी में ताजा पानी चलाकर उसकी गर्महाट को कम कर दें. इसके लिए तालाब के पास पानी की बड़ी मोटर का इंतजाम करके रखें.
पानी में प्रदूषण के चलते ऑक्सीबजन की मात्रा कम होना एक सामान्य बात है. लेकिन बड़ी बात यह है कि इसके चलते मछली पालक को कई बार बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. ऑक्सीजन की कमी के चलते मछलियां मरने लगती हैं. इसलिए समय-समय पर उपकरण की मदद से पानी का ऑक्सीजन और पीएच लेवल जांच लेना चाहिए. अगर ऑक्सीजन की कमी ज्यादा है तो मशीनों की मदद से ऑक्सीजन पानी में छोड़ी जानी चाहिए.
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