
लंपी बीमारी गायों को अपनी चपेट में ले रही है. कई राज्यों से लंपी के फैलने की खबरें आ रही हैं. लंपी के चलते गायों की मौत भी हो रही है. वहीं ऐसे में ये आशंका भी जताई जा रही है कि सितम्बर के शुरुआत में बारिश हो सकती है. दूसरी ओर अलनीनो भी सक्रिय हो सकता है. अगर वाकई में ऐसा होता है तो ये गायों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक हालात हो सकते हैं. क्योंकि अगर बारिश होती है तो ऐसे में गायों को लंपी ही नहीं आठ और भी दूसरे तरह की बीमारियां गायों को परेशान कर सकती हैं.
इसलिए जरूरी है कि पशुपालक अलर्ट रहें. जैसे ही गायों में कुछ बदलाव देखें तो फौरन ही पशु चिकित्सकों को इसकी सूचना दें. साथ ही जो घरेलू उपाय हैं उन्हें भी अपनाएं. बाढ़-बरसात के दौरान भैंसों के मुकाबले सबसे ज्यादा बीमारियां गायों को ही परेशान करती हैं. देशभर में भैंसों से ज्यादा गायों की संख्या है. भारत में गायों का दूध के अलावा खेती के काम में बहुत ही महत्व है.
सांस लेने में दिक्कत, गले में सूजन होती है. एंटीबायोटिक दवा और इंजेक्शन इलाज है. साथ ही बरसात के मौसम से पहले वैक्सीनेशन कराना चाहिए.
थनों में दिक्कत, दूध में छर्रे आना, थनों में सूजन इस बीमारी के लक्षण है. अलग-अलग दवाएं दी जाती हैं. पशु के दूध और थन की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए.
106-107 डिग्री तक बुखार होना, पशु के पैरों में सूजन, पशु का लंगड़ा कर चलना. बरसात से पहले वैक्सीनेशन करवाना और बीमार पशुओं को हेल्दी पशुओं से दूर रखना.
शरीर का तापमान कम हो जाना, सांस लेने में परेशानी होना. प्रसव के 15 दिन तक पूरा दूध न निकालें और पशु को कैल्शियम से भरा आहार और सप्लीमेंट दें.
मुंह और खुर में दाने होते हैं, दाने छाला बनकर फट जाते हैं और घाव गहरा हो जाता है. फौरन ही डॉक्टर को दिखाना चाहिए बरसात से पहले टीकाकरण कराना चाहिए और बारिश में पशु को खुले में चरने नहीं देना चाहिए.
पेशाब और गोबर में खून आना, तेज बुखार होना. पशु चिकित्सक से संपर्क कर स्थिति के हिसाब से उपचार करना चाहिए. इस रोग से बचाने के लिए वक्त रहते टीकाकरण करा लेना चाहिए.
पशु सुस्त हो जाता है, सूखी खांसी और नाक से खून आने लगता है. रोग के लक्षण दिखते ही पशु को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए. पशु के आहार का खास ध्यान रखना चाहिए.
पांच-छह महीने में योनिमुख से तरल गिरता है, बच्चे होने के लक्षण दिखते हैं, लेकिन गर्भपात हो जाता है. पशु की ठीक से सफाई करनी चाहिए, डीवॉर्मिंग करनी चाहिए और पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. छह से आठ महीने के पशु को ब्रुसेला का टीका लगवाना चाहिए.
पशु का बायां पेट फूल जाता है, पेट को थपथपाने पर ढोलक की आवाज आती है.
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