
मार्च महीने से गर्मियों की शुरुआत हो जाती है. और इसके साथ ही तापमान भी चढ़ता जाता है. गर्म हवाएं यानि लू भी चलने लगती है. गर्मियों की रातें भी गर्म हो जाती हैं. उत्तर भारत के ज्यादातर शहर 45 डिग्री तापमान को भी पार कर जाते हैं. ऐसे में इंसान ही नहीं पशु-पक्षी भी बेहाल हो जाते हैं. इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी आती है भालुओं को गर्मी से बचाने की. गौरतलब रहे कीठम, आगरा में बियर रेस्क्यू सेंटर है. यहां पर बड़ी संख्या में भालु रहते हैं. इसका संचालन वाइल्ड लाइफ एसओएस करता है.
अप्रैल से लेकर जून तक भालुओं को गर्मी से बचाने के लिए यहां हर संभव उपाय किए जाते हैं. इसमे देखभाल के साथ-साथ खानपान में भी बदलाव किया जाता है. खास तरह से कटिंग किए हुए फलों को फ्रिज में जमाकर उन्हें भालुओं को खाने के लिए दिया जाता है. खासतौर से खाने में ऐसे फल दिए जाते हैं जो हाइड्रेटिंग यानि पानी से भरपूर होते हैं. ठंडी हवा और पानी के फुव्वारों का इंतजाम भी सेंटर में ही किया जाता है.
आगरा भालू संरक्षण केंद्र में भालुओं को दिए जाने वाले तरबूज और खीरे जैसे हाइड्रेटिंग मौसमी फल अच्छी मात्रा में खाने को दिए जाते हैं. गर्मी को देखते हुए इनकी मात्रा बढ़ा दी जाती है. आइस पॉप्सिकल्स और जमे हुए फलों के ब्लॉक भालुओं को दिए जाते हैं. इस तरह से दिए जाने वाले फल भालुओं में ठंडक बढ़ाने का काम करते हैं. साथ ही पोषण भी देते हैं. भालुओं को गर्म हवाओं से बचाने के लिए उनके बाड़ों में कूलर और ओवरहेड स्प्रिंकलर लगाए जाते हैं. और ज्यादा राहत देने के लिए पानी के पूल भी गर्मियों में बनाए जाते हैं. गर्मी से तनाव के लक्षण दिखने वाले भालुओं में डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए ओआरएस भी पिलाया जाता है.
मथुरा में हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र और हाथी अस्पताल है. गर्मियां शुरू होते ही कैम्पस में सुबह-शाम सामान्य मौसम होने पर हाथियों को खुले में सैर कराई जाती हैं. सुबह जल्दी और देर शाम हाथियों को दोपहर की गर्मी से बचाते हुए सैर कराई जाती है. पानी के स्प्रिंकलर, नियमित पूल रखरखाव और अतिरिक्त ओआरएस पाउडर हाथियों को हाइड्रेटेड और आरामदायक बनाए रखने के लिए दिया जाता है. दिन में कई बार साफ पीने का पानी और छायादार जगह और मिट्टी के गड्ढे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं.
वाइल्ड लाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण का कहना है, "भारत में गर्मी तेजी से बढ़ रही है. हमारी देखभाल में रहने वाले जानवर भी इंसानों की तरह ही तेज गर्मी का सामना करते हैं. हमारे केन्द्रों की टीमें हर साल इन चुनौतियों का अनुमान लगाते हुए हर उस चीज का इंतजाम करती हैं जो हाथी और भालुओं को स्वस्थ, हाइड्रेटेड और खुश रहने में मदद करती हैं.
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