Animal Feed: पशुओं को कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और मिनरल्स साथ खि‍लाने हैं तो ये हैं एक्सपर्ट टिप्स 

Animal Feed: पशुओं को कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और मिनरल्स साथ खि‍लाने हैं तो ये हैं एक्सपर्ट टिप्स 

Animal Feed खुराक अच्छी मिलने से ही पशुओं का उत्पादन बढ़ता है. इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि थोड़ा-थोड़ा करके पशुओं को दिनभर कुछ न कुछ खि‍लाते रहना चाहिए. अगर हरा चारा भी एक्सपर्ट की टिप्स लेकर खि‍लाया जाए तो वो भी बैलेंस डाइट की जरूरत को पूरा कर देता है. बैलेंस डाइट में कौनसा और कितना हरा चारा होगा ये एक्सपर्ट तय करेंगे. 

पशुओं को खिलाएं ये हरा चारापशुओं को खिलाएं ये हरा चारा
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jul 20, 2026,
  • Updated Jul 20, 2026, 1:09 PM IST

उत्पादन करने वाले पशुओं की खुराक पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. जैसे गाय-भैंस दूध का उत्पादन करती हैं तो भेड़-बकरी मीट का उत्पादन करती हैं. ऐसे में इनका उत्पादन तभी बढ़ेगा जब इन्हें अच्छी और बैलेंस डाइट खाने को मिलेगी. एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट की मानें तो जब पशुओं को बैलेंस डाइट खाने को दी जाती है तो दूध-मीट का उत्पादन भी बढ़ता है और क्वालिटी में भी सुधार होता है. लेकिन ऐसा नहीं है कि बैलेंस डाइट के लिए पशुओं को अलग-अलग कुछ खास चीजें खि‍लाने की जरूरत होती है. 

कई तरह के हरे चारे से भी पशुओं की बैलेंस डाइट की जरूरत को पूरा किया जा सकता है. कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स इस बैलेंस डाइट की पहली जरूरत होती है. किस हरे चारे के साथ कौनसा हरा चारा मिलाकर खिलाया जाए जिससे पशुओं की बैलेंस डाइट की जरूरत को पूरा किया जा सके, ये जानने के लिए किसान तक ने अलग-अलग कई फोडर और न्यूट्रीशन एक्सपर्ट से बात की है. 

फायदेमंद है घास और दलहनी चारा  

फोडर एक्सपर्ट ने बताया कि नेपियर घास बहुवर्षिय चारे में शामिल है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक होता है. जैसे नेपियर घास. एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक लगातार आप इससे चारा ले सकते हैं. लेकिन सवाल ये है कि पशुओं को सिर्फ एक ही तरह के हरे चारे पर नहीं रखना चाहिए. जैसे अगर नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ दलहनी चारा भी उगा लें. जैसे सितम्बर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है. मतलब नेपियर के साथ सीजन के हिसाब से दूसरा हरा चारा लगा सकते हैं.  

अब जब भी आप अपने पशु को नेपियर घास खाने के लिए दें तो उसके साथ उसे दलहनी चारा जरूर दें. नेपियर घास में अगर कर्बोहाइड्रेड है तो लोबिया में प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स शामिल हैं. और इसी तरह की खुराक भेड़-बकरी हो या फिर गाय-भैंस उन्हें इसकी जरूरत होती है. इसे खाने के बाद पशु से दूध ज्यादा मिलता है तो उनके वजन में भी बढ़ोतरी होती है और मीट का स्वाद बढ़ता है. 

खूब खि‍लाएं पेड़ों की पत्त‍ियां

एक्सपर्ट की मानें तो सर्दियों के मौसम में हरे चारे की थोड़ी कमी हो जाती है. नेपियर घास भी उतनी नहीं मिल पाती है. दूसरी बात ये कि जमीन पर पड़े चारे के मुकाबले बकरी डाल से तोड़कर खाना पसंद करती है. इसमे बकरी को एक खास खुशी भी महसूस होती है. अगर मैदान में हरा चारा नहीं है तो हम ट्री फोडर यानि नीम, गूलर, अरडू आदि पेड़ की पत्तियां खिला सकते हैं. अगर स्वाद और पसंद की बात करें तो बकरियां इन्हें खाना खूब पसंद करते हैं. सर्दियों में तो खासतौर पर नीम की पत्तियां खाना बहुत पसंद करती हैं. 

और एक खास बात ये कि पेड़ों की पत्तियां बकरियों के लिए चारा तो होती ही हैं, साथ में दवाई का काम भी करती हैं. जैसे नीम खाने से पेट में कीड़े नहीं होते हैं. दूसरा ये कि बरसात में होने वाले हरे चारे में पानी की मात्रा बहुत होती है. इससे डायरिया होने का डर बना रहता है. जबकि पेड़ों में पानी कम होता है तो डायरिया की संभावना ना के बराबर रहती है.

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