
दूध की लागत बढ़ने में हरे चारे का बड़ा रोल है. मिलता भी मुश्किल से है और जहां मिलता है तो महंगा मिलता है. यही वजह है कि गाय-भैंस, भेड़-बकरियों को पौष्टिकता से भरपूर और सस्ता चारा नहीं मिल पा रहा है. जबकि एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट की मानें तो पशुओं की बॉडी ग्रोथ, दूध उत्पादन बढ़ाने और दूध की कीमतें कम करने में हरा चारा मददगार साबित होता है. अगर आप भी पशुओं को जरूरत के मुताबिक साल के 12 महीने हर चारा खिलाना चाहते हैं तो चारे के संबंध में एक्सपर्ट के टिप्स फॉलो करने होंगे. पशुपालकों की परेशानी है कि उन्हें खासतौर पर गर्मी और बरसात के दौरान हरे चारे की बहुत परेशानी होती है.
बरसात में तो ये हाल हो जाता है कि हरा चारा सीधे काटकर नहीं खिलाया जा सकता है. लेकिन हर रोज हरा चारा खिलाना भी जरूरी है. एक्सपर्ट का कहना है कि दूध की लागत दूध का उत्पादन बढ़ाकर ही कम की जा सकती है और उत्पादन बढ़ता है चारे से. इसी को ध्यान में रखते हुए फरवरी से ही तीन खास हरे चारे की तैयारियां करनी होंगी. अगर मार्च में ये तीन चारे लगाए तो फिर बरसात के दौरान भी चारे की कमी नहीं होगी.
फोडर एक्सपर्ट का कहना है कि किसान चारे की फसल के बीज बेचकर भी अपनी इनकम बढ़ा सकते हैं. अगर बरसीम, जई और रिजका की फसल से बीज उत्पादन किया जाए तो अच्छी इनकम होगी. वहीं उनका कहना है कि खासतौर पर गर्मियों में हरे चारे की बेहद कमी हो जाती है. इसलिए मई-जून में पशुओं के लिए हरे चारे की कोई कमी ना रहे इसके लिए मार्च में ही चारे की बुवाई शुरू कर दें. खासतौर पर ज्वार, बाजरा, लोबिया और मक्का की बुवाई कर अच्छा पौष्टिक चारा लिया जा सकता है. मार्च में बुवाई करने से मई में फसल काटी जा सकती है. किसानों को खासतौर पर हरे चारे के बारे में ये सलाह कृषि विज्ञान केंद्र, सदलपुर और गांव ढाणा कलां में किसान गोष्ठी के मौके पर दी गई. इस मौके पर 100 से ज्यादा किसान मौजूद थे.
एक्सपर्ट का कहना है कि घर पर भी हरे चारे से हे और साइलेज बड़ी ही आसानी से बनाया जा सकता है. लेकिन जरूरत है बस थोड़ी सी जागरुकता की. जैसे पतले तने वाले चारे की फसल को पकने से पहले ही काट लें. उसके बाद तले के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें. उन्हें तब तक सुखाएं जब तक उनमे 15 से 18 फीसद तक नमी ना रह जाए. हे और साइलेज के लिए हमेशा पतले तने वाली फसल का चुनाव करें.
क्योंकि पतले तने वाली फसल जल्दी सूखेगी. कई बार ज्यादा लम्बे वक्त तक सुखाने के चलते भी चारे में फंगस की शिकायत आने लगती है. यानि चारे का तना टूटने लगे इसके बाद इन्हेंय अच्छी तरह से पैक करके इस तरह से रख दें कि चारे को बाहर की हवा न लगे.
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