
दुनियाभर के ज्यादातर देशों में भारत से एक्सपोर्ट होने वाला घी-मक्खन खाया जाता है. लगातार ये आंकडा बढ़ रहा है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो साल 2022 से पहले देश से करीब 65 लाख मीट्रिक टन डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट होते थे. लेकिन अब ये आंकड़ा एक लाख टन से ऊपर पहुंच चुका है. इस आंकड़े में स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) शामिल नहीं है. स्किम्ड मिल्क पाउडर भी बड़ी मात्रा में भारत से दूसरे देशों को एक्सपोर्ट होता है. दूध की खपत और डेयरी एक्सपोर्ट बढ़ाने पर चर्चाएं हो रही हैं.
इसके लिए सबसे ज्यादा नजर घी और मक्खन पर है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि अगर घी-मक्खन को ब्रांड बनाया तो दूध की खपत और डेयरी एक्सपोर्ट दोनों ही बढ़ सकते हैं. अभी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारतीय घी का सबसे बड़ा खरीदार है. अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही ब्रिटेन भी भारतीय घी खरीदारों की लिस्ट में शामिल हो सकता है.
डेयरी एक्सपर्ट का कहना है कि घी एक आयुर्वेद प्रोडक्ट है. इससे हमारी त्वचा अच्छी होती है, दिमाग भी अच्छा होता है. लेकिन हमे ये बात दूसरे देशों को बतानी होंगी. जब इटली ऑलिव आयल के लिए और स्विट्जरलैंड चॉकलेट के लिए अपनी पहचान बना सकता है तो भारत भी घी में विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम कर सकता है. आज कुछ स्तर पर पशुपालन और डेयरी सेक्टर में काम करने की कुछ जरूरत है. खासतौर पर पशुओं की कुछ खास बड़ी बीमारियों को लेकर.
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