
घर हो या ऑफिस, जहां भी फिश एक्वेरियम होगा उसमे समुद्री गोल्डन मछली (ग्नैथनोडोन स्पेशियोसस) जरूर दिखाई देगी. या ये कह लें कि गोल्डन मछली के बिना एक्वेरियम अधूरा माना जाता था. लेकिन बीते कुछ साल से अचानक गोल्डन मछली एक्वेरियम से गायब होने लगी. बीते कुछ साल से अब घर-ऑफिस में एक्वेरियम तो दिखाई देते थे, लेकिन गोल्डन मछली दिखाई नहीं पड़ती थी. इसके पीछे ऑर्नामेंटल फिश एक्सपर्ट दो बड़ी वजह बताते हैं. पहली समुद्र से पकड़ी जाने वाली गोल्डन मछली के मुकाबले उसकी डिमांड बढ़ गई. वहीं इस बढ़ती हुई डिमांड में खाने वाले भी शामिल हो गए. स्वाद के चलते गोल्डन मछली खाई भी जाने लगी. गोल्डन मछली कम होने के पीछे ये एक बड़ी वजह भी शामिल हो गई. यही वजह रही कि बीते कुछ साल के लिए गोल्डन मछली एकदम से गायब सी हो गई.
लेकिन अच्छी खबर ये है कि एक बार फिर से गोल्डन मछली एक्वेरियम के साथ-साथ खाने वालों की प्लेट में भी नजर आएगी. सेंट्रल समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI), कोच्चि ने गोल्डन मछली को लेकर बड़ी कामयाबी हासिल की है. एक्वाकल्चर एक्सपर्ट की मानें तो हाई वैल्यू वाली समुद्री गोल्डन मछली जिसे गोल्डन ट्रेवली और गोल्डन किंग भी कहा जाता है को खुले समुद्री पिंजरों में भी तैयार किया जा सकेगा.
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CMFRI से जुड़े अफसरों की मानें तो CMFRI, विशाखापत्तनम सेंटर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. रितेश रंजन की टीम ने 2019 में इस मछली के बीज उत्पादन पर रिसर्च शुरू की थी. और पूरे पांच साल बाद अब इसमे कामयाबी मिली है. अगर गोल्डन मछली की पहचान की बात करें तो इसके पेट पर पीला रंग होता है, शरीर पर जगह-जगह काले धब्बे होते हैं, सभी पंख पीले रंग के होते हैं. इसकी पूंछ काले रंग की होती है. युवा गोल्डन मछली ज्या दा सुनहरे रंग की होती है. उस पर काले रंग की पट्टियां उन्हें बहुत डीसेंट लुक देती हैं. इसलिए ज्यादातर लोगों की कोशिश होती है कि उनके घर में रखे एक्वेरियम में गोल्डन मछली जरूर हो. सजावटी गोल्डन मछली बाजार में 200 से 250 रुपये प्रति पीस मिलती है.
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CMFRI के जानकारों की मानें तो फिश लैंडिंग के आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि गोल्डन या ट्रेवली मछली खासतौर पर तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, कर्नाटक और गुजरात में रीफ क्षेत्र के फिश लैंडिंग सेंटर पर पकड़ी गई मछलियां उतरती हैं. बीते पांच साल 2019, 2020, 2021, 2022 और 2023 के दौरान गोल्डन मछली की कुल लैंडिंग का आंकड़ा 1106, 1626, 933, 327 और 375 टन रहा है. ये आंकड़ा खासतौर पर रामनाथपुरम, नागापट्टिनम, चेन्नई, पुदुकोट्टई, तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, तिरुनेलवेली, तंजावुर का है. तूतीकोरिन, उडुपी और गिर सोमनाथ जिले भी इसमे शामिल हैं. मीट के लिए मछली का रेट 400 से 500 प्रति किलो तक रहता है.