
किसानों की इनकम डबल करने में बकरी पालन अहम रोल निभा सकता है. अभी जो बकरी पालन किया जा रहा है वो न तो योजना के अनुसार है और न ही अभी बकरी पालन सेक्टर का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है. क्योंकि इसके लिए अभी तक ज्ञान, साझेदारी और नस्ल सुधार पर कोई खास काम नहीं हुआ है. और इस पर काम करने के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय संसाधन संगठन बनाया जाए. ये संगठन राष्ट्रीय स्तर पर काम करेगा. जैसे उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल में ब्लैक बंगाल बकरी क्लस्टर (ग्रुप) की कामयाबी.
क्लस्टर का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि क्लस्टर के चलते टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और बाजार तक पहुंच आसान हो जाती है. और एक बड़ा फायदा ये कि क्षेत्रीय डेटा निजी निवेश को बढावा देता है. गौरतलब रहें भारत में 15 करोड़ से बकरियां हैं और लगभग 3.3 करोड़ ग्रामीण परिवार बकरी पालन पर निर्भर हैं. लेकिन भारत की बकरी अर्थव्यवस्था के लिए एक स्मार्ट और समावेशी भविष्य का खाका तैयार करने की जरूरत है.
केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेतली का कहना है कि बकरी पालन से जुड़ा विकसित भारत रोडमैप एक दूरदर्शी रणनीति है, जिसका मकसद उत्पादकता बढ़ाना, लचीलापन मजबूत करना, विज्ञान-संचालित, जलवायु-स्मार्ट नवाचारों के माध्यम से मूल्य श्रृंखला को आगे बढ़ाना है. वहीं उद्देश्य महिलाओं और छोटे किसानों को केंद्र में रखते हुए एकीकृत मॉडल के माध्यम से बकरी-आधारित आजीविका को मजबूत बनाना है.
अगर कोई बीटल बकरी को दूध का कारोबार करने के लिहाज से पालता है तो वो भी अच्छी कमाई कर सकता है. क्योंकि आज बकरी के दूध की डिमांड को देखते हुए उसकी कोई एक कीमत तय नहीं है. जो पंजाब बकरी पालने में शर्म महसूस करता था आज उसी पंजाब में बकरियों के 250 से ज्यादा बड़े फार्म हैं. ज्यादातर लोग बकरी के दूध का कारोबार कर रहे हैं.
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