
Wildlife News: सर्दी से राहत पाने को सांप बिलों से बाहर आ रहे हैं. आबादी के पास आने वाले सांपों (Snake) को वन विभाग की टीम लगातार रेस्क्यू करने में जुटी हुई है. वहीं वन विभाग का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला सामने आया है. बिजनौर के क्षेत्रीय वनाधिकारी महेश गौतम ने इंडिया टुडे के डिजिटल प्लेटफॉर्म किसान तक से बातचीत में बताया कि बीते दो महीने के अंदर कई सांपों को पकड़ा गया है. उन्होंने बताया कि अब तक 22 किंग कोबरा सांप, 30 अजगर सांप, 6 करैत सांप और 16 रसेल वाइपर सांप रेस्क्यू किया गया है.
महेश गौतम ने बताते हैं कि करैत सांप सबसे ज्यादा जहरीला होता है. क्योंकि वो बिल्कुल चींटी की तरह काटते है और डेथ रेट भी ज्यादा होता है. वहीं किंग कोबरा सांप के बारे में क्षेत्रीय वनाधिकारी महेश गौतम ने बताया कि यह सांप दो तरह से बाइट करते है, पहला फेक बाइट और दूसरा रियल वाइट. फेक बाइट में किंग कोबरा हलके तरीके से हमला करता है, जिससे लोगों की जान बच जाती है, जबकि रियल बाइट में वो पूरा जहर डालकर हमला करता है, इसमें जान जा सकती है. सबसे शानदार बात यह है कि इन सांपों ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है और लोग भी इनके प्रति संवेदनशील हैं.
बिजनौर के क्षेत्रीय वनाधिकारी महेश गौतम ने बताया कि सांप ठंडे खून के प्राणी माने जाते हैं और ठंड इनके शरीर को सुस्त कर देती है. प्राकृतिक रूप से सर्दी से बचाव करने के लिए इनके पास केवल धूप की गर्मी का ही सहारा होता है. सर्दी का असर बढ़ते ही सांपों ने खुद को गरम रखने के लिए धूप का सहारा लेना शुरू कर दिया है. सांप आमतौर पर भी घरों आदि में आते रहते हैं, लेकिन अब सांप किसी खुली जगह में धूप सेंकते हुए भी देखे जा रहे हैं.
गौतम ने आगे बताया कि जिले में आमतौर पर रॉक पायथन प्रजाति का अजगर मिल रहा है. 16 मीटर तक लंबे अजगर मिल चुके हैं. आमतौर पर अजगर इंसानों पर हमला नहीं करते हैं. अजगर खेतों में सुअर, गीदड़, खरगोश, नीलगाय के बच्चे तक को खा जाते हैं. ये एक तरह से किसानों की मदद ही करते हैं. ये बिल्कुल जहरीले नहीं होते हैं. कोई भी सांप अपना बिल खुद नहीं बनाता और ये दूसरे जीवों का शिकार करके उनके बिल पर कब्जा कर लेते हैं.
क्षेत्रीय वनाधिकारी ने बताया कि अजगर के अलावा जिले में रसेल वाइपर और क्रेट सांप भी मिलते हैं. रसेल वाइपर को आम भाषा में धामन या धामड भी कहा जाता है. ये दोनों सांप जहरीले होते हैं.