
बरसात के दिनों में घर पर जो दूध आता है वो पहले के मुकाबले ज्यादा पतला लगता है. ऐसा महूसस होता है कि इसमे भरपूर पानी मिलाया गया है. इतना ही नहीं कई बार तो ऐसा दूध आता है जो गर्म करने पर पीला पड़ जाता है. पीने पर कड़वापन महसूस होता है. कभी-कभी तो गर्म करते वक्त ये दूध फट भी जाता है. अब क्योंकि दूध किचिन की रोजमर्रा की दिनचर्या का अहम हिस्सा होता है. कुछ ही किचिन ऐसे होंगे जहां दिन की शुरुआत दूध से न होती हो.
यहां तक की सुबह-सुबह पूजा-पाठ में भी दूध-दही का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. लेकिन आज-कल दूध को लेकर खूब चर्चा छिड़ी हुई है. हालांकि दूध उत्पादन के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है. बीते साल ही देश में करीब 25 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ था. देश के सिर्फ पांच राज्यों में ही कुल उत्पादन का 53 फीसद दूध उत्पादन होता है.
दूध की बूंद को चिकनी सतह पर गिराएं.
अगर बूंद धीरे बहे और सफेद निशान छोड़े तो शुद्ध दूध है.
मिलावटी दूध की बूंद बिना निशान छोड़े तेजी से बह जाएगी.
सिंथेटिक दूध स्वाद में कड़वा लगता है.
उंगलियों के बीच रगड़ने पर साबुन जैसा चिकनापन लगता है.
गर्म करने पर पीला पड़ जाता है.
अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग
जानकारों की मानें तो मिलावट खोर सिंथेटिक दूध को तैयार करने में टाइटेनियम डाई ऑक्साइड, बी वैक्स (मधुमक्खी के छत्ते से निकलने वाला मोम) की मिलावट करते हैं. टाइटेनियम डाई ऑक्साइड ना खाने योग्यन सफेद रंग का पाउडर होता है. इसे पानी में मिलाने पर उसका रंग दूध जैसा दिखने लगता है. फिर दूध में मिठास लाने के लिए वी बैक्स मिलाया जाता है. दूध को तैयार करने के लिए मिलावटखोरों ने लैब भी बना ली हैं. केमिकल से तैयार दूध को इलेक्ट्रिक मथनी से फेटा जाता है, जिससे की सभी आइटम अच्छी तरह से मिल जाएं.
डेयरी से जुड़े जानकारों की मानें तो दूध में यूरिया भी मिलाया जा रहा है. यूरिया भी हैल्थ को बहुत नुकसान पहुंचाता है. लेकिन यूरिया की भी दूध में घर पर ही पहचान की जा सकती है. जैसे टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध और सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाएं. इसके पांच मिनट बाद लाल लिटमस पेपर इसमें डुबोएं. और अगर पेपर का रंग नीला हो जाए तो इसका मतलब यूरिया मिला हुआ है.
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