साहीवाल, गिर और राठी गायों का दूध तो अपना एक खास महत्व रखता ही है, लेकिन बद्री गाय का दूध सिर्फ दूध न होकर दवाई भी है. बड़ी खास बात ये है कि बद्री गाय का दूध ए2 प्रोटीन से भी भरपूर है. आज तक सोशल मीडिया पर गायों के दूध में खास ए2 बताते हुए उसके मुंह मांगे दाम वसूले जा रहे हैं. इसी को देखते हुए बद्री गाय का महत्व बढ़ गया है. खास उत्तराखंड की नस्ल बद्री गाय को बहुत ही अहम नस्ल माना जाता है. गौरतलब रहे बद्री गाय को संरक्षण देने के लिए उसकी कुंडली बनाने का काम अपने आखिरी चरण में है. कुल 20 पॉइंट पर बद्री गाय की कुंडली तैयार की गई है.
इसका मकसद बद्री गाय का दूध उत्पादन बढ़ाना और नस्ल सुधार करना है. साल 2026 की शुरुआत तक इस काम को पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है. जानकारों की मानें तो इसी कुंडली के आधार पर आगे की रिसर्च होगी. रिसर्च में मदद के लिए तीन हजार से ज्यादा बद्री गायों की कुंडली तैयार की गई है. बद्री गाय हर रोज डेढ़ से दो लीटर तक दूध देती है. इसी को देखते हुए बद्री गाय की नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्तराखंड में एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.
ऐसे तैयार हो रही है बद्री गायों कुंडली
- मिल्क रिर्काडिंग का काम ऐसी बद्री गायों पर किया जा रहा है जिनका पूर्व ब्यांत में दूध उत्पादन 3.5 लीटर प्रतिदिन से ज्यादा हो.
- मिल्क रिर्काडर के लिए ऐसे युवाओं का चयन किया गया है जो स्थानीय, शिक्षित, बेरोजगार हैं. गांवों की भौगोलिक स्थिति के अनुसार मिल्क रिकार्डर्स की संख्या का निर्धारण किया गया है.
- चुने गए गांवों में बद्री गायों की पहचान 12 डिजिट के यूनिक आईडेटिफिकेशन टैग से की जा रही है. पशुपालक और पशु का पंजीकरण इनाफ साफ्टवेयर पर किया जायेगा.
- एक मिल्क रिकार्डर एक दिन में पांच से ज्यादा बद्री गायों की मिल्क रिर्काडिंग नहीं करता है.
- मिल्क रिर्काडिंग के लिए चुनी गईं बद्री गाय के ब्याने के पांचवें दिन से 25वें दिन के अन्दर पहली मिल्क रिर्काडिंग का कार्य शुरू किया गया है. उससे ज्यादा वक्त के ब्याय हुए पशुओं में मिल्क रिकार्डिंग का कार्य नहीं किया जा रहा है.
- गाय की मिल्क रिर्कोडिंग हर महीने एक तय तारीख को सुबह और शाम को हो रही है. यह हर महीने की तय तारीख को दूध दुहान की जगह पर हो रही है.
- हर महीने एक-एक मिल्क रिर्काडिंग (सुबह-शाम) की जा रही है. दुग्ध रिकार्डिंग, नियत रिर्काडिंग की तिथि से पांच दिन पूर्व या पांच दिन बाद भी की जा रही है.
- हर एक गाय की कम से कम 16 रिर्काडिंग (सुबह-शाम) और अधिकतम 20 रिकार्डिंग (सुबह-शाम) की जा रही हैं.
- परियोजना के तहत 20 रिकार्डिंग (सुबह-शाम) या पशु के दूध सूखने तक मिल्क रिर्काडिंग की जा रही है.
- मिल्क रिर्कोडर को मिल्क रिकार्डिंग का शेड्यूल तैयार कर समय पर उपलब्ध कराया जा रहा है. जिसमें पशु का विवरण, रिकार्डिंग का विवरण, पशुपालक का पता, गांव का नाम, मिल्क रिर्काडिंग की तारीख और समय होगा.
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