
मछली पालन और एक्वाकल्चर में इंटरनेशनल लेवल पर भारत की साझेदारी बढ़ रही हैं. जलवायु परिवर्तन, Ocean health, स्थिरता, मछली पालन में जवाबदेही, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, ग्रीन इनोवेशन, क्षमता निर्माण, सप्लाई सीरिज का विकास, सजावटी मछली पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती जैसे उभरते क्षेत्र मछली पालन बेहतर सहयोग के रूप में सामने आए. ये चर्चा हो रही थी सीफूड एक्सपोर्ट प्रोत्साहन पर गोलमेज सम्मेलन के दौरान इस सम्मेलन का आयोजन सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में किया जा रहा था. इस दौरान मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन भी मौजूद थे.
राजीव रंजन का कहना है कि भारत मजबूत नीतियों, प्रोसेसिंग क्षमता और रसद के बल पर भारत एक प्रमुख वैश्विक मछली पालन और एक्वाकल्चर क्षेत्र के रूप में उभर रहा है. इसी का नतीजा है कि बीते एक दशक में सीफूड एक्सपोर्ट का मूल्य डबल हो गया है. उनका ये भी कहना है कि नेशनल फ्रेमवर्क ऑन ट्रेसबिलिटी (2025), ईईजेड नियम (2025) और अपडेट होने वाले समुद्री मछली पालन दिशानिर्देश (2025) की मदद से भारत अनुपालन और पारदर्शिता को मजबूत कर रहा है.
मछली, पशुपालन और डेयरी, अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने बताया कि भारत में मछली पालन उत्पादन में हुई बढ़ोतरी और विभाग के सीफूड एक्सपोर्ट को एक लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने में कामयाबी मिली है. पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 फीसद की बढ़ोतरी हुई है और यह इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति को दिखाता है.
मछली पालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष का कहना है कि औपचारिकीकरण और डिजिटलीकरण में बढ़ोतरी के कारण भारत के सीफूड एक्सपोर्ट में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि और निर्यात की मात्रा में भी बढ़ोतरी हो रही है. उन्होंने कहा कि आज यह क्षेत्र गुणवत्तापूर्ण पैकेजिंग, नियामक समन्वय और मजबूत ट्रेसिबिलिटी सिस्टम द्वारा परिभाषित है. उन्होंने ये भी कहा कि भारत में पहले से ही कई संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) मौजूद हैं और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय चर्चाएं भी शुरू की जाएंगी।
इनलैंड मछली पालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा ने भारत की वैश्विक समुद्री खाद्य उपस्थिति को मजबूत करने के बारे में बताया. वैश्विक गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए खाद्य सुरक्षा, जानकारी लेने की क्षमता और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन के प्रति विभाग की दृढ़ प्रतिबद्धता का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य स्थिरता, निवेश के अवसरों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सार्थक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है.
फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गानाइजेशन (एफएओ) के सहायक प्रतिनिधि (एफएओआर) कोंडा चाव्वा ने डिजिटल ट्रेसबिलिटी, प्रमाणन प्रणालियों और उच्च-मूल्य वाले बाजारों तक पहुंच को मजबूत करने में देशों का समर्थन करने के लिए एफएओ की प्रतिबद्धता पर बल दिया. साथ ही अवैध तरीके से मछली पकड़ने की रोकथाम के वैश्विक प्रयासों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि एफएओ उन निवेश प्रस्तावों का समर्थन और वित्तपोषण करने के लिए तैयार है जो भारत के मछली पालन के विकास को गति दे सकते हैं, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ा सकते हैं और भारत के व्यापक ब्लू इकोनॉमी विजन के अनुरूप हो सकते हैं.
मछली पालन और एक्वाकल्चर से जुड़ इस गोलमेज सम्मेलन में अल्बानिया, अंगोला, चीन, कोलंबिया, इक्वाडोर, फिजी, घाना, ग्वाटेमाला, आइसलैंड, ईरान, जमैका, जॉर्डन, मलेशिया, मालदीव, मोरक्को, पनामा, पेरू, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, उरुग्वे, सेनेगल, मोल्दोवा, टोगो, बेनिन, कतर, मैक्सिको, वेनेजुएला, वियतनाम, मिस्र, फ्रांस, इंडोनेशिया, इराक, माली, नॉर्वे, गिनी गणराज्य, रूस, स्पेन, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब सहित 40 देशों के राजनयिकों ने भाग लिया. ये राजनयिक एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र से हैं. अगर अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बात करें तो खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), एजेंस फ्रांसेज़ डे डेवलपमेंट (एएफडी), ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसामेनार्बीट (जीआईजेड), बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस कार्यक्रम में सहभागिता की. इस मौके पर मत्स्य विभाग और विभिन्न संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.
ये भी पढ़ें- Egg Rate: बाजार में पहली बार 8 से 12 रुपये तक का बिक रहा अंडा, ये है बड़ी वजह
ये भी पढ़ें- Egg Testing: अंडा खरीद रहे हैं तो भूलकर भी न करें ये काम, ऐसे जांचें अंडे की क्वालिटी