डेयरी से जुड़े किसानों और व्यवसायियों को गाय-भैसों के बांझपन से काफी नुकसान उठाना पड़ता है. उन्हें अक्सर ये पता ही नहीं चल पाता कि उनके दुधारू पशुओं में मां बन पाने की क्षमता है या नहीं. अगर उन्हें समय से पशुओं के बांझपन की जानकारी मिल जाए, तो वह इसका इलाज करा सकते हैं. पशुपालन के एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेयरी संचालकों के लिए यह जानना बहुत ही जरूरी है कि उनके पशुओं में बांझपन क्यों आता है और इसका कैसे पता लगाया जा सकता है.
दरअसल बांझ पशु को पालना किसानों के लिए आर्थिक संकट से कम नहीं है. पशुओं में बांझपन की समस्या से छुटकारा चाहिए, तो किसानों को कुछ विशेष बातों पर ध्यान देने की जरूरत है. किसान तक को बिहार वेटनरी कॉलेज के मादा पशु रोग विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ आलोक कुमार ने गाय-भैंसों के बांझपन की कई वजहें बताईं. इनमें पहली वजह यह है कि मादा पशुओं में कोई जन्मजात समस्या हो सकती है. दूसरी वजह यह हो सकती है कि नर पशु के अंदर कोई समस्या हो, जिसके सीमेन का उपयोग गाय या भैंस के गर्भधारण करने में किया जा रहा हो. लेकिन कई बार प्रबंधन बेहतर नहीं होने से भी दुधारू पशुओं में बांझपन की समस्या होती है, जिसका किसानों को खास खयाल रखना चाहिए.
डॉ आलोक कुमार का कहना है कि कुछ पशुओं में जन्मजात बांझपन की समस्या देखने को मिलती है. देशी पशु आमतौर पर तीन साल में बच्चा देने के योग्य हो जाती हैं. उनमें हर 21 दिनों के अंतराल पर गर्भ धारण करने की अवस्था आती है, लेकिन अगर तीन प्रयास में भी मादा पशु गर्भ धारण नहीं करती है, तो ये पशु के बांझ होने का संकेत है. इसके बाद पशुपालकों को एक अच्छे डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए, ताकि दुधारू पशु के बांझपन की जांच की जा सके और उनका इलाज भी किया जा सके.
जब मादा पशु गर्भवती होने के लिए तैयार होती है, उस दौरान कृत्रिम गर्भाधान के समय अच्छी क्वालिटी के नर पशु के सीमेन का उपयोग करना चाहिए. पशु में बांझपन की समस्या तब भी सामने आती है, जब उनका कृत्रिम गर्भाधान कराया जा रहा हो. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसानों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि पशु डॉक्टर ने उच्च क्वालिटी के नर पशु का सीमेन का उपयोग किया है. अगर सीमेन की क्वालिटी अच्छी नहीं है या सही समय पर उसका उपयोग नहीं किया गया है, तब भी पशु बांझपन की शिकार हो जाती है.
डॉ. आलोक के मुताबिक दुधारू पशुओं में बांझपन होने की मुख्य वजह उनका प्रबंधन सही नहीं होना होता है. अगर दुधारू पशुओं को समय से हरा चारा, जो सम्पूर्ण भोजन का एक तिहाई होना चाहिए, नहीं मिलता तो उनके मां बनने में समस्या आ जाती है. पशु के भोजन में मिनरल्स का मिक्सचर देना अत्यंत आवश्यक होता है. साथ में पशुओं का रख रखाव भी बेहतर होना चाहिए. गर्मी के मौसम में घर से लेकर जानवरों के ऊपर तक पानी का छिड़काव करना बेहद जरूरी होता है. अगर इन चीजों का ध्यान किसान नहीं देता है, तो पशु तनाव में आते हैं और वह बांझपन की शिकार हो जाती हैं.
मादा पशु, बच्चेदानी में इन्फेक्शन होने की वजह से गर्भ धारण नहीं कर पाती हैं. इसके पहचाने का सही तरीका है कि अगर गर्भाधान के लिए तैयार पशु का स्राव शीशे की तरह साफ नहीं है, धुंधला या दूधिया स्राव हो रहा है, तो वह बच्चेदानी में इन्फेक्शन होने के लक्षणों में से एक है. इसके लिए डॉक्टर को तत्काल दिखाना चाहिए और गाय-भैंस की बच्चेदानी में इन्फेक्शन का इलाज कराना चाहिए.
अगर दो से तीन बार सीमेन देने के बाद भी पशु का गर्भ नहीं ठहरता है, तो ऐसे हालात में किसान सबसे पहले पशु की बच्चेदानी में इन्फेक्शन की जांच कराएं. उसके बाद भी समस्या बनी रहती है, तो हार्मोन की जांच बेहद जरूरी होती है. वहीं पशुओं के रहने वाले स्थान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. क्रॉस ब्रीड वाली गाय एवं भैंस के लिए विशेष इंतजाम करना चाहिए. साथ ही भोजन में पौष्टिक चारा देना चाहिए.