केन्द्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर पशु नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने जैसी योजनाएं चला रही है. इसके लिए सरकार का सबसे ज्यादा जोर गर्भाधान (एआई), भ्रूण प्रत्यारोपण और सेक्स सॉर्टेट सीमन पर है. इसके लिए शहर-शहर पशुओं के वीर्य की व्यवस्था कराई जा रही है. लैब, दुकानों से लेकर पशु मैत्री तक वीर्य स्ट्रॉ बेच रहे हैं. लैबों में पशुओं का भ्रूण प्रत्यारोपण भी हो रहा है. लेकिन खासतौर पर वीर्य को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं. कमजोर क्वालिटी वाला वीर्य बाजार में बेचा जा रहा है.
हालांकि इस पर रोकथाम के लिए राज्य सरकार नियम और जुर्माना दोनों ही तय कर चुकी है. अभी बिहार में इसे लागू किया गया है. लेकिन ऐसे कानून की मांग अब पूरे देश में हो रही है. डिमांड है कि वीर्य बेचने वाले और कृत्रिम गर्भाधान (एआई) कराने वाले टेक्निनशियन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाए. साथ ही जो रजिस्ट्रेशन नहीं कराए उस पर जुर्माना लगाने के साथ ही सख्त नियम भी बनाए जाएं.
अभी किस पर कितना लग रहा जुर्माना
- सीमेन स्टेशन पर 15 लाख रुपये का जुर्माना.
- भ्रूण प्रत्यारोपण करने वाली लैब पर पांच लाख का जुर्माना.
- वीर्य और एआई सर्विस देने वाली एजेंसी पर 10 लाख का.
- एआई और वीर्य से जुड़ी दूसरी सर्विस की ट्रेनिंग देने पर पांच लाख.
- पशुओं की एआई कराने वाले टेक्निलशियन पर 15 हजार रुपये का जुर्माना.
कितने साल का होगा रजिस्ट्रेशन
- सीमेन स्टेशन को दो साल.
- भ्रूण प्रत्यारोपण लैब को दो साल.
- एआई सर्विस देने वाली एजेंसी को पांच साल.
- टेक्निपशियन को पांच साल.
- ट्रेनिंग सेंटर को तीन साल.
देनी होगी रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल फीस
- सीमन स्टेशन की रजिस्ट्रेशन फीस 25 और रिन्यूअल फीस 10 हजार.
- भूण प्रत्यारोपण लैब की रजिस्ट्रेशन फीस 25 और रिन्यूअल फीस 10 हजार.
- कृत्रिम गर्भाधान सर्विस एजेंसी की रजिस्ट्रेशन फीस 20 और रिन्यूअल फीस 10 हजार.
- एआई कराने वाले टेक्नि्शियन की रजिस्ट्रेशन फीस एक हजार और रिन्यूअल फीस 500 हजार.
- वीर्य और एआई से जुड़े ट्रेनिंग सेंटर की रजिस्ट्रेशन फीस 20 और रिन्यूअल फीस 10 हजार.
सख्त होगी सीमेन की जांच
- स्टोर करके रखे गए सीमन के भंडारण, वितरण और गुणवत्ता की जांच की जाएगी.
- पशु और मत्स्य संसाधन विभाग के विशेषज्ञ समय-समय पर इसका सैंपल लेंगे.
- घटिया गुणवत्ता के सीमेन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.
- इसके लिए भी अलग से जुर्माने की राशि तय की गई है.
- रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित विभाग में आवेदन देना होगा.
- विशेषज्ञों का पैनल आवेदनों की जांच करेगा.
- जांच में मानक अनुरूप पाए जाने पर पंजीकरण कर लिया जाएगा.
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