
देश में करीब 30 करोड़ दुधारू पशु हैं. 25 साल से भी ज्यादा वक्त से देश दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है. ये तब है जब हमारे देश में गायों का एवरेज दूध उत्पादन दूसरे देशों के मुकाबले बहुत कम है. बीते साल देश में करीब 25 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ था. हालांकि इसके पीछे कई बड़ी वजह बताई जाती है, लेकिन उन्हीं में से एक वजह हरा चारा भी है. फोडर एक्सपर्ट की मानें तो देश में हरे चारे की कमी है और जहां है भी तो महंगा बिक रहा है.
एक्सपर्ट की मानें तो देश में हरे ही नहीं तीनों तरह हरे-सूखे और मिनरल्स चारे की कमी 25 फीसद से भी ऊपर निकल गई है. यही वजह है कि दूध और उससे बने प्रोडक्ट महंगे होते जा रहे हैं. सूखे चारे समेत मिनरल्स मिक्चर की कमी देखी जा रही है. महंगे प्रोडक्ट की वजह से देश के डेयरी प्रोडक्ट, एक्सपर्ट मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं.
डॉ. राजेश शर्मा, डीजीएम, एनडीडीबी और फिरोज अहमद, डॉयरेक्ट र, कॉर्नेक्स्ट एग्री प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने चर्चा के दौरान डेयरी लागत कम करने पर जोर दिया. उनका कहना है कि डेयरी में पशुओं के पोषण वरीयता दी जानी चाहिए. उत्पादकता बढ़ाने पर काम होना चाहिए. चारे की कमी या फिर इमरजेंसी के हालात में लगातार चारे की सप्लाई बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम स्थापित करने चाहिए. क्वालिटी के चारे और बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यवार योजनाएं बननी चाहिए. इंपोर्ट को कम करते हुए बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दें. नॉन फारेस्ट बंजर जमीन, चरागाह भूमि और सामुदायिक भूमि का इस्तेमाल हरे चारे की खेती के लिए करना चाहिए.
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