Green Fodder: ये 15 काम हो जाएं तो दूर हो जाएगी महंगे हरे चारे की कमी, पढ़ें डिटेल 

Green Fodder: ये 15 काम हो जाएं तो दूर हो जाएगी महंगे हरे चारे की कमी, पढ़ें डिटेल 

Green Fodder डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट के मामले में भारत की पोजिशन अच्छी नहीं है. डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो इसके पीछे बहुत सारे कारण हैं. लेकिन चारा उत्पादन से जुड़े कुछ उपायों को अपनाया जाए तो चारे की महंगाई और उसकी कमी जैसी परेशानियों को दूर किया जा सकता है.

पोषण का खजाना है यह घासपोषण का खजाना है यह घास
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jun 19, 2026,
  • Updated Jun 19, 2026, 9:20 AM IST

देश में करीब 30 करोड़ दुधारू पशु हैं. 25 साल से भी ज्यादा वक्त से देश दूध उत्पादन में पहले नंबर पर है. ये तब है जब हमारे देश में गायों का एवरेज दूध उत्पादन दूसरे देशों के मुकाबले बहुत कम है. बीते साल देश में करीब 25 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुआ था. हालांकि इसके पीछे कई बड़ी वजह बताई जाती है, लेकिन उन्हीं में से एक वजह हरा चारा भी है. फोडर एक्सपर्ट की मानें तो देश में हरे चारे की कमी है और जहां है भी तो महंगा बिक रहा है. 
एक्सपर्ट की मानें तो देश में हरे ही नहीं तीनों तरह हरे-सूखे और मिनरल्स चारे की कमी 25 फीसद से भी ऊपर निकल गई है. यही वजह है कि दूध और उससे बने प्रोडक्ट महंगे होते जा रहे हैं. सूखे चारे समेत मिनरल्स मिक्चर की कमी देखी जा रही है. महंगे प्रोडक्ट की वजह से देश के डेयरी प्रोडक्ट, एक्सपर्ट मार्केट में अपनी जगह नहीं बना पा रहे हैं. 

ऐसे कम होगी डेयरी लागत 

डॉ. राजेश शर्मा, डीजीएम, एनडीडीबी और फिरोज अहमद, डॉयरेक्ट र, कॉर्नेक्स्ट एग्री प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने चर्चा के दौरान डेयरी लागत कम करने पर जोर दिया. उनका कहना है कि डेयरी में पशुओं के पोषण वरीयता दी जानी चाहिए. उत्पादकता बढ़ाने पर काम होना चाहिए. चारे की कमी या फिर इमरजेंसी के हालात में लगातार चारे की सप्लाई बनी रहे इसके लिए क्षेत्रीय चारा बैंक और स्टोरेज गोदाम स्थापित करने चाहिए. क्वालिटी के चारे और बीजों की सप्लाई में सुधार के लिए राज्यवार योजनाएं बननी चाहिए. इंपोर्ट को कम करते हुए बरसीम जैसे फलीदार बीजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दें. नॉन फारेस्ट  बंजर जमीन, चरागाह भूमि और सामुदायिक भूमि का इस्तेमाल हरे चारे की खेती के लिए करना चाहिए. 

चारे के लिए दिए ये खास टिप्स 

  • चारा बीज प्रोसेसिंग और स्टो‍रेज के लिए सुविधाओं को बढ़ाया जाए. 
  • ज्यादा पोषण मूल्य वाली चारा फसलों के विकास और मीथेन उत्सर्जन को कम करने की जरूरत है.
  • ज्या दा चारा करने वाले क्षेत्रों से कम चारे वाले क्षेत्रों में चारे के लिए ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनाई जाए. 
  • फसल के अवशेष के ब्लॉक, गांठ, टीएमआर और छर्रों आदि के ट्रांसपोर्ट के लिए प्रोत्साहन दें.
  • दूध उत्पादन दक्षता में सुधार के लिए सटीक फीडिंग विधियों पर काम हो. 
  • रेडी-टू-ईट टोटल मिक्चर रोशन में निवेश करें.
  • क्वाउलिटी के फीड उत्पादन सुनिश्चित करने और दूषित पदार्थों को कंट्रोल करने के लिए नियम बनें.  
  • चारा प्लस एफपीओ का लाभ उठा कर और एक मॉडल की तरह पेश कर दूसरों को प्रोत्साहित करें. 
  • डेटाबेस मैनेजमेंट, सूचना एक्सचेंज करने के लिए राष्ट्रीय या क्षेत्रीय चारा ऑनलाइन प्लेटफार्म बने. 

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