Meat Export: ओमान के बाद अब इन 14 देशों पर है भारत की नजर, चार लाख करोड़ का मीट बाजार है वजह

Meat Export: ओमान के बाद अब इन 14 देशों पर है भारत की नजर, चार लाख करोड़ का मीट बाजार है वजह

Meat Export भारत से मीट की सप्लाई के साथ ही खरीदार को मीट के हलाल होने का सर्टिफिकेट भी देना होगा. ये सर्टिफिकेट देश की कुछ तय की गईं संस्थाएं देंगी. इन संस्थाओं को सरकार ने मान्यता दी है. संस्थाओं को भारत अनुरूपता मूल्यांकन योजना (I-CAS) के हलाल से जुड़े मानकों का पालन करना होगा. और इसकी निगरानी भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) करेगी. 

Raw Meat/UnsplashRaw Meat/Unsplash
नासि‍र हुसैन
  • New Delhi,
  • Jan 13, 2026,
  • Updated Jan 13, 2026, 3:38 PM IST

Meat Export बीते साल दिसम्बर में ओमान ने भारत के हलाल मीट सर्टिफिकेट को मान्यता दे दी है. अब भारत से मीट एक्सपोर्टर ओमान को हलाल मीट एक्सपोर्ट कर सकेंगे. लेकिन इसके बाद भारत ने अब दूसरे 14 देशों की ओर भी रुख किया है. इसी तरह की मान्यता सरकार ने 14 देशों से भी चाहती है. इसके लिए भारत ने अनुरूपता मूल्यांकन योजना (I-CAS) के हलाल से जुड़े नए मानक तय किए हैं. केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त देश की तीन संस्थाएं मीट एक्सपोर्टर को हलाल सर्टिफिकेट देंगी. 

गौरतलब रहे भारत के बोवाइन मीट को दुनियाभर के ज्यादातर देशों में पसंद किया जाता है. इतना ही नहीं एक इंटरनेशनल रिपोर्ट के मुताबिक साल 2027 में विश्व का हलाल मीट कारोबार 4 लाख करोड़ का हो जाने की उम्मीद है. यही वजह है कि विश्व के मीट बाजार के एक बड़े हिस्से पर कब्जे के लिए सरकार जोर-शोर से तैयारी कर रही है. 14 देशों में ज्यादातर खाड़ी देश हैं.   

देश की ये दो संस्थाएं देंगी हलाल सर्टिफिकेट 

विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी हुई लिस्ट के मुताबिक भारत से बहरीन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, मलेशिया, ओमान, फिलीपींस, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात को हलाल मीट एक्सपोर्ट किया जाएगा. इसमे ओमान से मान्यता मिल चुकी है. भारतीय गुणवत्ता परिषद इसकी निगरानी करेगी. साथ ही सरकार से मान्यता प्राप्त देश की तीन संस्थाएं लखनऊ का हलाल शरीयत इस्लामिक लॉ बोर्ड (HASIL), मुम्बई का JUHF सर्टिफिकेशन प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलमा ए हिंद हलाल ट्रस्ट इन्हें हलाल मीट होने का सर्टिफिकेट देंगी.  

तीन साल में बढ़ गया सवा लाख टन मीट एक्सपोर्ट

अगर एपीडा के जारी आंकड़ों पर जाएं तो अकेले बफैलो मीट का एक्सपोर्ट ही बीते तीन साल में सवा लाख टन बढ़ गया है. आंकड़ों के मुताबिक साल 2021-22 में 11 लाख, 75 हजार, 193 टन बफैलो का एक्सपोर्ट हुआ था. वहीं साल 2022-23 में 11 लाख, 75 हजार, 869 टन मीट एक्सपोर्ट हुआ था. लेकिन साल 2023-24 का आंकड़ा खासा चौंकाने वाला है. बीते साल 12 लाख, 95 हजार, 603 टन बफैलो मीट का एक्सपोर्ट भारत से दुनिया के अलग-अलग देशों को हुआ था. इसकी कीमत 31 हजार करोड़ रुपये थी.

हलाल के हिसाब से सेट होती है मशीनों की टाइमिंग 

आपको ये जानकर हैरत होगी लेकिन सच ये ही है कि मीट प्रोसेसिंग यूनिट में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की टाइमिंग भी हलाल सर्टिफिकेट के नियमों के मुातबिक सेट की जाती है. अगर मशीनों की टाइमिंग हलाल के हिसाब से नहीं है तो उस कंपनी को सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा. इतना ही नहीं कंपनी में जानवर या मुर्गे को हलाल (काटने) करने वाला कर्मचारी मुस्लिम होना जरूरी है.

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