
बेशक मछली जल की रानी है और जीवन उसका पानी है, लेकिन ये भी सच है कि 24 घंटे पानी में रहने वाली मछलियों को भी जाड़े के मौसम में सर्दी लगती है. सिर्फ ठंड ही नहीं लगती है, बल्कि ठंड लगने पर बीमार भी हो जाती हैं. यही वजह है कि ठंड से बचने के लिए मछलियां भी इंसानों की तरह से खुद से कुछ इंतजाम करती हैं. इसमे खुराक कम कर देना और अपनी रहने की जगह को बदल देना खास है. फिशरीज एक्सपर्ट का कहना है कि 24 घंटे पानी में रहने वाली मछलियों को भी ठंड लगती है. ठंड लगने से बीमार भी होती हैं, क्योंकि मछलियां ठंडे खून वाली होती हैं, इसलिए खुद को गर्म रखने के लिए उनके पास कोई उपाय नहीं होता है.
नदी, समुद्र और झील के पानी में रहने वाली मछलियों के मुकाबले तालाब की मछलियों को ज्यादा ठंड लगती है. मछलियां समुद्र, नदी की हों या फिर तालाब की, ठंड सभी को लगती है. इसलिए समुद्र और नदी की मछलियां ठंड बढ़ते ही अपनी रहने की जगह बदल देती हैं. वो ऐसे इलाके में चली जाती हैं जहां तापमान कुछ कम होता है. अगर तालाब में रहने वाली मछलियों की बात करें तो इन्हें ज्यादा ठंड लगती है. ये भी अपनी रहने की जगह को बदल देती हैं. हालांकि पशुपालक कुछ उपाय अपनाकर इन्हें ठंड से बचाने की कोशिश करते हैं.
कोल्ड वॉटर फिशरीज रिसर्च, उत्तराखंड के रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. डीएस चन्द्रा का कहना है कि जाड़ों के मौसम में जब मछलियों को ये महसूस होता है कि तालाब का पानी ज्यादा ठंडा हो गया है या होने वाला है तो वो अपनी रहने की जगह को बदल देती हैं. मछलियां अपनी प्रजाति के हिसाब से तालाब में तीन जगह रहती हैं. एक वो है जो सतह पर रहना पसंद करती है. एक तालाब की तली में रहती है. वहीं कुछ ऐसी भी होती हैं जो पानी के बीच में रहती हैं.
लेकिन जैसे ही तालाब का पानी ठंडा होने लगता है तो सतह और बीच में रहने वाली मछलियां तालाब की तली में चली जाती हैं. क्योंकि तालाब के नीचे का पानी सतह और बीच के मुकाबले सामान्य रहता है. अब अगर समुद्र और नदी की बात करें तो पहली बात तो ये है कि बहता हुआ पानी ज्यादा ठंडा नहीं होता है. रुका हुआ पानी जैसे तालाब का ज्यादा जल्दी ठंडा होता है. दूसरी बात ये है कि जो मछलियां सक्षम होती हैं तो वो पानी के तापमान में बदलाव आते ही पानी में बहकर दूसरी जगह चली जाती हैं.
फिशरीज एक्सपर्ट डॉ. नवीन मूर्ति ने किसान तक को बताया कि नवंबर से ही तालाब का पानी ठंडा होना शुरू हो जाता है. खासतौर पर सुबह और शाम के वक्त पानी के तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव महसूस होने लगता है. जबकि तालाब की मछलियों को आराम से रहने के लिए 25 से 30 डिग्री तापमान वाले पानी की जरूरत होती है. लेकिन जैसे ही पानी का तापमान 25 डिग्री से नीचे जाने लगता है तो मछलियां बैचेन होने लगती हैं. जिसके चलते मछलियां तनाव में आ जाती हैं.
तनाव के चलते मछलियों की ग्रोथ भी रुक जाती है. इसी ठंड और तनाव को दूर करने के लिए मछलियां को गर्माहाट दी जाती है. गर्माहाट देने के लिए मछलियों को गर्म पानी से नहलाया जाता है. सुबह-शाम मछलियों के ऊपर पम्प की मदद से ग्राउंड वॉटर डाला जाता है. क्योंकि जमीन से निकला पानी गुनगुना होता है, और तालाब के ठंडे पानी में मिलकर यह पूरे पानी को सामान्य कर देता है. लेकिन ये तरीका सिर्फ उन तालाबों में आजमाया जाता है जो तालाब साइज में छोटे होते हैं.
डॉ. नवीन ने बताया कि जब तालाब का साइज बड़ा हो तो मछलियों को ग्राउंड वॉटर से नहलाना आसान नहीं होता है. और ना ही ये भी मुमकिन है कि ग्राउंड वॉटर को तालाब के ठंडे पानी में मिलाकर सामान्य कर दिया जाए. अब ऐसे में पानी को सामान्य करने और मछलियों में गर्मी लाने के लिए दो काम किए जाते हैं. पहला तो ये कि तालाब में जाल डाला जाता है. जाल डालते ही दो चीजें एक साथ होती हैं. पहली तो ये कि जाल के पानी में गिरते ही मछलियां तालाब में यहां-वहां तेज-तेज तैरना शुरू कर देती हैं.
दूसरा जाल डालने से पानी में उथल-पुथल होती है और इन दोनों ही हरकत से ठंडा पानी सामान्य होने लगता है. जाल के अलावा तालाब में भैंसें भी उतारी जाती हैं. भैंस के पानी में उतरते ही मछलियों में खलबली मच जाती है. बड़े जानवर को देखकर वो इधर-उध तेज-तेज तैरना शुरू कर देती हैं. ऐसा करना मछलियों की ग्रोथ के लिए भी फायदेमंद रहता है. वहीं पानी में उथल-पुथल होती है और ठंडा पानी भी सामान्य होने लगता है.
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