
मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने एक अहम पहल की है. राज्य गया ‘गोरस मोबाइल ऐप’ अब पशुपालकों के लिए एक उपयोगी डिजिटल साथी बनने जा रहा है. इस ऐप के जरिए पशुपालक घर बैठे अपने पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और उत्पादन से जुड़ी सटीक जानकारी हासिल कर सकेंगे, जिससे दूध उत्पादन के साथ उनकी आय में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है.
प्रदेश में बड़ी संख्या में गाय और भैंसों का पालन किया जा रहा है, लेकिन ज्यादातर पशुपालक अभी भी पारंपरिक आहार पद्धति पर निर्भर हैं. संतुलित और वैज्ञानिक पोषण की कमी के कारण पशुओं की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है. इसके चलते दूध उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक गिरावट, गर्भधारण में दिक्कत और बार-बार हीट में आने जैसी समस्याएं सामने आती हैं. इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह तकनीकी समाधान तैयार किया है.
‘गोरस मोबाइल ऐप’ पशुपालकों को उनके पशु के अनुसार संतुलित आहार की सटीक जानकारी देगा. पशुपालक जैसे ही ऐप में पशु की नस्ल, वजन, दुग्ध उत्पादन, गर्भावस्था की स्थिति और वर्तमान आहार जैसी जानकारी दर्ज करेंगे, ऐप उसी आधार पर उपयुक्त आहार योजना सुझाएगा.
इतना ही नहीं, यह भी बताया जाएगा कि आहार में सुधार करने पर एक ब्यांत में कितना अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिल सकता है. साथ ही, गलत आहार से होने वाले संभावित नुकसान की जानकारी भी ऐप के जरिए मिल सकेगी.
इस ऐप में विभिन्न नस्लों जैसे गिर, साहीवाल, थारपारकर, मुर्रा और भदावरी के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन दिया गया है. इसके अलावा अवर्णित पशुओं के लिए नस्ल सुधार के सुझाव भी शामिल किए गए हैं.
28 से अधिक स्थानीय चारे की जानकारी और उनके संयोजन से अधिकतम उत्पादन प्राप्त करने के तरीके भी ऐप में उपलब्ध रहेंगे. मौसम और गर्भावस्था के अनुसार आहार में स्वतः बदलाव की सुविधा इसे और उपयोगी बनाती है.
गोरस ऐप की खास बात यह है कि यह पूरी तरह हिंदी भाषा में तैयार किया गया है और बिना इंटरनेट के भी काम कर सकता है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को भी इसका पूरा लाभ मिल सकेगा. ऐप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि कम पढ़े-लिखे पशुपालक भी आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें.
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि यह ऐप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर फ्री में उपलब्ध कराया जाएगा. पशुपालक इसे डाउनलोड कर अपने मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण और प्रबंधन से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे.