
मध्यप्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी गतिविधियों को और तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है.मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पशुपालकों को बेहतर बाजार, उचित भुगतान और आधुनिक डेयरी व्यवस्था से जोड़ने के लिए अधिकारियों को कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि से जुड़े प्रयासों की समीक्षा की. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) और दुग्ध संघों का कार्यभार ग्रहण करने के बाद राज्य स्तरीय संचालन समिति की बैठक में डेयरी क्षेत्र के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए.
प्रदेश में अब तक लगभग 2 हजार नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1,926 दुग्ध सहकारी समितियां गठित हुई हैं, जबकि 801 निष्क्रिय समितियों को दोबारा क्रियाशील बनाया गया है.
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028-29 तक 3,827 अतिरिक्त दुग्ध सहकारी समितियां गठित की जाएं. इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है.
प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विस्तार का असर दूध संकलन पर भी दिखाई देने लगा है. वर्ष 2024-25 में जहां प्रतिदिन 8.73 लाख किलोग्राम दूध का संकलन किया जा रहा था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 9.66 लाख किलोग्राम प्रतिदिन हो गया.
वर्ष 2026-27 में जुलाई माह तक प्रदेश में प्रतिदिन 9.75 लाख किलोग्राम दूध का संकलन किया गया है. बैठक में बताया गया कि दूध संकलन में पिछले दो वर्षों की तुलना में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
दूध उत्पादन बढ़ने के साथ दुग्ध उत्पादकों को होने वाले भुगतान में भी वृद्धि हुई है. वर्ष 2024-25 में दुग्ध उत्पादकों को 1,477 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,780 करोड़ रुपये हो गया.इस तरह भुगतान राशि में भी 27 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
सरकार का जोर अब इस व्यवस्था को और मजबूत करने पर है, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक सहकारी समितियों से जुड़ें और उन्हें दूध के लिए बेहतर एवं नियमित बाजार मिल सके.
डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने ग्वालियर और जबलपुर दुग्ध संघों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई है.
ग्वालियर दुग्ध संघ को दूध संकलन और तैयार करना के लिए 470 लाख रुपये, जबकि जबलपुर दुग्ध संघ को 500 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया है. इससे दोनों दुग्ध संघों में संकलन और प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री ने दुग्ध क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए हैं. इसके तहत दूध के संकलन से लेकर खरीद और बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.मैदानी स्तर पर खरीद कार्य में लगे कर्मचारियों के लिए आईटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही पूरी डेयरी वैल्यू चेन के डिजिटाइजेशन पर भी काम किया जाएगा.
दूध के अलावा घी, दही और छाछ जैसे दुग्ध उत्पादों की बिक्री में भी वृद्धि हो रही है. इसे देखते हुए शहरी क्षेत्रों में नए दुग्ध पार्लर आवंटित करने के प्रयास किए जाएंगे.इसका उद्देश्य केवल दूध बिक्री तक सीमित न रहकर दुग्ध उत्पादों के बाजार का विस्तार करना और सहकारी समितियों तथा पशुपालकों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर तैयार करना है.
दुग्ध सहकारी समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र बनाने के लिए इनमें माइक्रो एटीएम स्थापित करने के प्रयास भी किए जाएंगे. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने और दुग्ध उत्पादकों को वित्तीय लेन-देन में सुविधा मिलने की उम्मीद है.इसके अलावा एमपीसीडीएफ को महिला सदस्यता को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं.सरकार का मानना है कि डेयरी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिल सकती है.
पिछले दो वर्षों में प्रदेश में दुग्ध सहकारी समितियों के विस्तार, दूध संकलन में वृद्धि, पशुपालकों को बढ़े भुगतान और डेयरी तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों को इसी बड़े लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है.
सरकार की योजना अब अधिक गांवों को डेयरी सहकारिता से जोड़ने, दूध संकलन बढ़ाने, प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने और दुग्ध उत्पादों का बाजार विस्तार करने की है. यदि तय लक्ष्यों के मुताबिक समितियों का विस्तार और दूध संकलन में वृद्धि जारी रहती है, तो मध्यप्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में डेयरी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.