जीविका दीदियों का कमाल, दूध कारोबार 16 करोड़ से बढ़कर 145 करोड़ के पार

जीविका दीदियों का कमाल, दूध कारोबार 16 करोड़ से बढ़कर 145 करोड़ के पार

बिहार की जीविका दीदियों ने डेयरी कारोबार में बड़ी सफलता हासिल की है. कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी से 49 हजार से ज्यादा महिलाएं जुड़ चुकी हैं और कंपनी का सालाना कारोबार 16.54 करोड़ रुपये से बढ़कर 145.01 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

Jivika DidiJivika Didi
अंक‍ित कुमार स‍िंह
  • पटना,
  • Oct 05, 2026,
  • Updated Oct 05, 2026, 11:46 AM IST

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन आमदनी का बेहतर माध्यम बन चुका है. पहले जहां परंपरागत तौर-तरीकों के साथ लोग पशुपालन करते थे, लेकिन अब पशुपालन को ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने रोजगार का सबसे बड़ा माध्यम बना चुके हैं और इसमें पुरुषों के साथ महिलाओं की सहभागिता तेजी से बढ़ रही है. एक ऐसी कहानी सहरसा जिले की है, जहां 49,000 से अधिक जीविका दीदियों ने कठिन मेहनत और लगन के बदौलत करीब 9 सालों में दुग्ध उत्पादन और उसके खरीद-बिक्री के कारोबार को करोड़ों में पहुंचा दिया है. सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड की स्थापना को लेकर जीविका के अधिकारियों के अनुसार, सहरसा में कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी का गठन सितंबर 2017 में किया गया था, जबकि इसका व्यावसायिक संचालन अक्टूबर 2018 से शुरू हुआ.

16 हजार से 49 हजार तक जुड़ी महिलाओं की सदस्यता

सहरसा की कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी लिमिटेड के विस्तार को लेकर शुरुआती चरण में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा तक ही डेयरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने की योजना थी. हालांकि, महिलाओं की रुचि और बढ़ती सहभागिता को देखते हुए खगड़िया और मुंगेर तक इसका विस्तार किया गया.

आज इस कंपनी को बिहार जीविका से वित्तीय सहायता और एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त है. वहीं, स्थापना के बाद से कंपनी ने अभूतपूर्व प्रगति की है. वर्ष 2019-20 में जहां कंपनी से 16,656 महिला सदस्य जुड़ी थीं, वहीं अगस्त 2026 तक यह संख्या बढ़कर 49,344 हो गई है. इसी अवधि में औसत दैनिक दूध संग्रह 11,436 किलोग्राम से बढ़कर 94,180 किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया है.

53 प्रखंडों से रोजाना 92,218 किलो दूध कलेक्शन

हाल के समय में कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी का कुल शेयर 479 लाख रुपये के आसपास है, जिसकी पहुंच बिहार के 5 जिलों के 53 प्रखंडों तक है. वहीं, 17 बल्क मिल्क कूलरों और 1,192 कार्यशील मिल्क प्रोक्योरमेंट पॉइंट्स के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 92,218 किलोग्राम दूध का संग्रह कर रही है.

कंपनी की आर्थिक मजबूती उसके कारोबार के आंकड़ों में साफ झलकती है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में कंपनी का कुल टर्नओवर 16.54 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में लगभग 8.8 गुना बढ़कर 145.01 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त तक ही कंपनी 74.81 करोड़ रुपये का कारोबार कर चुकी है. कारोबार में हुई इस वृद्धि का सीधा लाभ महिला दुग्ध उत्पादकों को मिल रहा है. किसानों को किया जाने वाला भुगतान 2019-20 के 14.38 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 113.10 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग 8 गुना की बढ़ोतरी दर्शाता है.

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का सफल उदाहरण

जीविका के सहयोग से संचालित यह कंपनी केवल दूध संग्रह ही नहीं, बल्कि कृत्रिम गर्भाधान, संतुलित पशु आहार, मिनरल मिश्रण और हरा चारा जैसी सुविधाएं भी सदस्यों को उपलब्ध करा रही है. वहीं, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार कहते हैं कि कौशिकी महिला दूध उत्पादक कंपनी ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और सामूहिक उद्यमिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. जीविका के सहयोग से शुरू हुआ यह मॉडल आज हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है.

कौशिकी की यह सफलता दिखाती है कि जब ग्रामीण महिलाओं के छोटे-छोटे प्रयासों को संगठित ढांचे और बाजार से जोड़ा जाता है, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा दोनों बदल सकता है.

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